
Gen-Z Politics India : देश की राजनीति में अब Gen-Z सबसे अहम वोटर वर्ग बनकर उभर रहा है। यही वजह है कि प्रमुख राजनीतिक दल और उनके नेता युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया की नई भाषा और डिजिटल ट्रेंड का सहारा ले रहे हैं। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री Narendra Modi, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi और Mohan Bhagwat ने अलग-अलग मंचों और तरीकों से युवाओं से संवाद बढ़ाने की पहल की है।
PM मोदी ने अपनाया GRWM ट्रेंड
राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक शॉर्ट वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने युवाओं से GRWM (Get Ready With Me) ट्रेंड के जरिए हैंडलूम परिधान पहनकर वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की।
GRWM इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर लोकप्रिय वीडियो फॉर्मेट है, जिसे खासकर Gen-Z के बीच काफी पसंद किया जाता है। प्रधानमंत्री का संदेश भी इसी आधुनिक डिजिटल शैली में रिकॉर्ड किया गया।
शनिवार को प्रधानमंत्री Indian Institute of Technology Delhi के 57वें दीक्षांत समारोह में भी छात्रों को संबोधित करेंगे, जहां तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।
राहुल गांधी का AMA सेशन
दूसरी ओर, राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर AMA (Ask Me Anything) सेशन शुरू किया है। इस डिजिटल संवाद के माध्यम से वह छात्रों और युवाओं के सवालों का सीधे जवाब दे रहे हैं।
राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इससे पहले वह कोटा और देहरादून में भी छात्रों के साथ संवाद कर चुके हैं। इन कार्यक्रमों में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, शिक्षा की लागत और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
RSS भी युवाओं तक पहुंचने की कोशिश में
इधर, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी हाल ही में करीब 60 मिनट तक Gen-Z युवाओं के साथ संवाद किया। इससे यह संकेत मिलता है कि केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि वैचारिक संगठन भी नई पीढ़ी से जुड़ने के लिए नए संवाद माध्यम अपना रहे हैं।
सोशल मीडिया बना नई राजनीति का केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया अब केवल प्रचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। छोटे वीडियो, लाइव इंटरैक्शन, AMA सेशन और ट्रेंडिंग फॉर्मेट के जरिए नेता युवाओं से सीधा जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
Gen-Z मतदाताओं की बढ़ती संख्या और डिजिटल उपस्थिति को देखते हुए आने वाले चुनावों में यह रणनीति और अधिक प्रभावी हो सकती है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया पर सक्रियता वास्तविक राजनीतिक समर्थन में कितनी बदलती है।



