
New Delhi News-बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने को लेकर बड़ा बयान दिया है। भारत में रह रहीं हसीना ने कहा है कि वह इस साल बांग्लादेश वापस जाना चाहती हैं। उन्होंने अपनी वापसी को लोकतंत्र, कानून और अपने देश के लोगों से जुड़े मुद्दे के रूप में बताया है।
NDTV के साथ बातचीत में शेख हसीना से पूछा गया कि क्या भारत और बांग्लादेश की सरकारों के बीच उनकी वापसी को लेकर पर्दे के पीछे कोई बातचीत चल रही है। इस पर उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा अपने देश लौटने की है।
हसीना ने कहा कि वह बांग्लादेश की नागरिक हैं और उन्होंने लंबे समय तक देश की सेवा की है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान देश के विकास और लोगों की समस्याओं पर काम किया।
‘मुझे अपने देश लौटने का अधिकार’
शेख हसीना ने कहा कि वह मानती हैं कि उन्हें अपने देश वापस जाने का अधिकार है। उन्होंने अपनी वापसी को शांतिपूर्ण और कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता ऐसी वापसी है, जो बांग्लादेश के लोगों और देश के हित में हो। हसीना ने यह भी कहा कि उनकी वापसी को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं, लेकिन उनकी इच्छा अपने लोगों के बीच लौटने की है।
फांसी की सजा पर भी दिया जवाब
बांग्लादेश की अदालत से मिली मौत की सजा को लेकर पूछे गए सवाल पर शेख हसीना ने अपने कानूनी पक्ष की बात रखी। उन्होंने मौजूदा न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रभावित बताया। यह उनका व्यक्तिगत दावा है, जबकि बांग्लादेश में उनके खिलाफ मामला और फैसला अलग कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
हसीना ने अपने परिवार के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने 1975 में अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान और परिवार के कई सदस्यों की हत्या का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद वह कई वर्षों तक बांग्लादेश से बाहर रहीं और 1981 में वापस लौटीं।
‘कानूनी अधिकारों की सुरक्षा चाहती हूं’
शेख हसीना ने कहा कि उनका विश्वास लोकतंत्र और कानून के शासन में है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ चलाया गया ट्रायल राजनीतिक उद्देश्य से प्रभावित था। हसीना ने कहा कि वह अपने कानूनी अधिकारों की सुरक्षा चाहती हैं।
इससे पहले भी शेख हसीना सार्वजनिक रूप से बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता चुकी हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने Reuters से बातचीत में भी साल के अंत तक देश लौटने की योजना की बात कही थी।
वहीं, बांग्लादेश में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और ढाका की ओर से भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी की गई है। ऐसे में उनकी वापसी का मुद्दा भारत-बांग्लादेश संबंधों और वहां की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है।
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