
New Delhi:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक युवा सम्मेलन में लोकतंत्र, शिक्षा, रोजगार और नई पीढ़ी की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाना और संवाद करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसलिए हर आंदोलन को राष्ट्रविरोध से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
युवाओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आज की Gen Z और Gen Alpha पीढ़ी पहले की तुलना में अधिक जिज्ञासु है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी बिना तथ्यों और तर्क के किसी भी बात को स्वीकार नहीं करती, जो लोकतांत्रिक समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। उनके अनुसार, सवाल पूछने की प्रवृत्ति समाज को बेहतर दिशा देने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद या मतभेद का समाधान संविधान के दायरे में रहकर और संवाद के माध्यम से खोजा जाना चाहिए। भारतीय परंपरा में विचार-विमर्श और शास्त्रार्थ की समृद्ध परंपरा रही है, जिससे विभिन्न मतों के बीच संतुलित समाधान निकलता है।
शिक्षा के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि इसे केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम या व्यवसाय नहीं माना जाना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए और इसके लिए सरकार के साथ समाज तथा शैक्षणिक संस्थानों की भी समान जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पदों को भरने और इस क्षेत्र में पर्याप्त निवेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
रोजगार को लेकर उन्होंने कहा कि केवल सरकारी या निजी नौकरी ही सफलता का रास्ता नहीं है। युवाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार की ओर भी बढ़ना चाहिए, ताकि वे स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
छात्रों पर कथित पैलेट गन फायरिंग से जुड़े सवाल पर भागवत ने कहा कि उनके पास घटना की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि नई पीढ़ी के प्रति उनका भरोसा मजबूत है और वे युवाओं की सोच एवं ईमानदारी पर विश्वास करते हैं।



