
मुंबई। पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे ने पाकिस्तान के साथ संवाद को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सीमा के दोनों ओर रहने वाले आम नागरिकों को कट्टर दुश्मन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों देशों के लोगों की समस्याएं – रोटी, कपड़ा और मकान समान हैं।
न्यूज एजेंसी से बातचीत में जनरल नरवणे ने कहा कि जब दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी समझ और मित्रता बढ़ेगी, तो द्विपक्षीय संबंध भी बेहतर होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों के बीच संपर्क और संवाद महत्वपूर्ण हैं, चाहे वह ‘ट्रैक टू कूटनीति’, सांस्कृतिक आदान-प्रदान या खेल आयोजनों के माध्यम से ही क्यों न हो।
उन्होंने आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध समाप्त करने के लिए लोगों के बीच संपर्क आवश्यक है और बातचीत के लिए रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए। होसबाले ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान का सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व भारत का विश्वास खो चुका है, इसलिए नागरिक समाज की भूमिका बढ़नी चाहिए।
जनरल नरवणे ने कहा कि विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सैन्य शक्ति का उपयोग समाप्त हो गया है। भारत शांति की नीति में विश्वास रखता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर देश अपनी सुरक्षा के लिए बल प्रयोग करने में भी संकोच नहीं करेगा। उन्होंने कूटनीति और सैन्य शक्ति के संतुलन को राष्ट्रीय हित के लिए आवश्यक बताया।



