Amul Milk Price Hike: 14 मई से महंगा होगा दूध, जानें नई कीमतें और बढ़ोतरी की वजह

Amul Milk Price Hike: देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच अब दूध की कीमतों में भी इजाफा होने जा रहा है। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF), जो अमूल ब्रांड के तहत डेयरी उत्पाद बेचता है, ने 14 मई से दूध के दाम बढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले का असर खासतौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है।

GCMMF के अनुसार, दूध उत्पादन और वितरण से जुड़ी लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पशुओं के चारे की कीमतों में वृद्धि, पैकेजिंग सामग्री के बढ़ते दाम और परिवहन ईंधन की महंगाई के कारण कंपनी पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है। इन्हीं वजहों से दूध की कीमतों में संशोधन किया गया है।

फेडरेशन ने यह भी कहा कि किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करना इस फैसले का एक बड़ा कारण है। GCMMF से जुड़े सदस्य संघों ने दूध उत्पादकों को मिलने वाले खरीद मूल्य में प्रति किलो फैट पर 30 रुपये की बढ़ोतरी की है। यह मई 2025 के बाद लगभग 3.7 प्रतिशत की वृद्धि मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि इससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

नई कीमतों के तहत दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश में अमूल के विभिन्न दूध उत्पाद महंगे हो जाएंगे।

नई कीमतें इस प्रकार हैं:

  • Amul Slim (500 ml) – अब 27 रुपये
  • Amul Taaza (500 ml) – अब 30 रुपये
  • Cow Milk (500 ml) – अब 31 रुपये
  • Amul Gold (500 ml) – अब 36 रुपये
  • Buffalo Milk – 4 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 80 रुपये

कंपनी के मुताबिक, कुल मिलाकर दूध की कीमतों में लगभग 2.5 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। GCMMF का कहना है कि यह बढ़ोतरी मौजूदा खाद्य महंगाई दर की तुलना में कम है और इसे संतुलित रखने की कोशिश की गई है।

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वहीं, डेयरी सेक्टर में GCMMF की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान फेडरेशन का कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। कंपनी का टर्नओवर 11 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 73,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बढ़ती मांग और निर्यात में विस्तार को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।

GCMMF करीब 36 लाख दूध उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करता है और इसके डेयरी उत्पाद 50 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। ऐसे में कंपनी का यह कदम केवल व्यवसायिक निर्णय नहीं, बल्कि किसानों की आय और डेयरी उद्योग की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

हालांकि, दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त बोझ लेकर आएगी, खासकर ऐसे समय में जब रोजमर्रा की कई जरूरी वस्तुएं पहले से ही महंगी हो चुकी हैं।

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