
सोनभद्र। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर सर्वोदय शिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित दी आर्यनस एकडमी स्कूल के प्रांगण में जागरूकता कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि कृष्ण मोहन काशी प्रान्त के संयोजक पर्यावरण संरक्षण गतिविधि एवं अध्यक्षता कथाकार रामनाथ शिवेंद्र, विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त ओम प्रकाश त्रिपाठी, प्रबंधक विनोद कुमार जालान विभाग संयोजक पर्यावरण संरक्षण गतिविधि सोनभद्र विभाग , प्रधानाचार्य चित्रा जालान एवं साहित्यकार एवं कवि प्रदुमन त्रिपाठी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।

जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य रूप से विश्व पृथ्वी दिवस पर हमारी शक्ति हमारा ग्रह थीम के साथ पर्यावरण संरक्षण हेतु चर्चा एवं जागरूक कर सभी को संकल्प एवं प्रतिज्ञा दिलाया गया। सभी ने संकल्प लिया की मैं पृथ्वी दिवस पर प्रतिज्ञा करता हूँ की मैं विद्युत और सभी प्रकार की ऊर्जा का बिना किसी अपव्यय के जिम्मेदारी पूर्वक उपयोग करूँगा। मैं जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करुँगा स्वचछ, हरित और नविकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दूंगा। मैं अपने दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाऊंगा ऐसा करने के लिए समाज में सभी को प्रेरित करुँगा क्योकि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण ” धरती माता और आने वाली पीढ़ियों के हित के लिए आवश्यक हैँ।
संकल्प दिलाने के बाद स्कूली बच्चों एवं बच्चियों को चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से धरती बचाओं पेड़ लगाओं विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता कराते हुए जागरूक किया गया।
वही छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कृष्ण मोहन प्रान्त संयोजक पर्यावरण संरक्षण गतिविधि काशी प्रान्त ने बताया कि गर्मी केवल मौसम नहीं है, यह एक चेतावनी है। धरती चुप नहीं है। वह लगातार संकेत दे रही है कि कुछ गंभीर रूप से गलत हो रहा है। हर साल तापमान नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है। शहर गर्म तवे की तरह जल रहे हैं, नदियाँ सिकुड़ रही हैं, जंगलों की हरियाली धुएँ और धूल में बदल रहा है। कभी जो गर्मी असामान्य लगती थी, आज वही सामान्य बनती जा रही है। सवाल यह है कि क्या हम सच में इस खतरे को समझ रहे हैं, या केवल पंखे, कुलर और एयर कंडीशनर बढ़ाकर खुद को धोखा दे रहे हैं? पहले प्रकृति में एक संतुलन था। ऋतुएँ समय पर आती थीं, बारिश अपने समय पर होती थी, और धरती जीवन को सहजता से पोषित करती थी। लेकिन आज यह संतुलन टूट चुका है। कहीं बाढ़ सब कुछ बहा ले जाती है, तो कहीं महीनों तक सूखा धरती को फाड़ देता है। कहीं जंगल आग में जल रहे हैं, तो कहीं शहरों की हवा सांस लेने लायक नहीं बची। और यह सब केवल “प्राकृतिक परिवर्तन” नहीं है।
प्रधानाचार्य चित्रा जालान ने बताया कि यदि पृथ्वी ना होती तो हमारा अस्तित्व ही ना होता और ना ही हम किसी दूसरे ग्रह पर जा पाते इसलिये यदि पृथ्वी को कुछ भी हो जाता हैँ तो हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। हमें याद रखना चाहिए की आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी का संरक्षण होना आवश्यक हैँ और हम अपनी इच्छा अनुसार इसके संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग नही कर सकते हैँ इसलिये हम सभी लोगों की जिम्मेदारी बनती हैँ की हम सभी लोग पानी को बर्बाद ना करें पानी को बचाये, पेंड़ को कटने से बचाये, पेंड़ का संरक्षण करें।
वही कथाकर रामनाथ शिवेंद्र ने कहा कि आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण हैँ क्योकि यह हमारे दृष्टिकोण को बदल सकता हैँ। इस दिन हमें खुद को प्रकृति से अलग नहीं बल्कि जटिल रूप से जुडा हुआ देखने के लिए प्रेरित करता हैँ। हर किसी को अपने दैनिक जीवन में छोटे छोटे बदलाव करना चाहिए जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। पृथ्वी दिवस को खास बनाने के लिए पर्यावरण से जुडी कई गतिविधियों में शामिल हो सकते हैँ इसलिये हम सभी को पेंड़ लगाना चाहिए।
साहित्यकार ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि हमें घरों व ऑफिस में प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना चाहिए। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट साइकिल का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रकृति के सैर पर जाना चाहिए अपनी जीवन शैली में छोटे छोटे बदलाव करके आप पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैँ।
वही संस्था के सचिव विष्णु तिवारी ने लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि भारी मात्रा में पेड़ काटे जाने, नदी व वायु प्रदुषण के चलते ग्लोबल वार्मिंग पुरे विश्व के लिए खतरे का संकेत हैँ। पृथ्वी का संतुलन बिगड़ना हम सभी के लिए एक बड़ी समस्या हैँ हर किसी को पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना चाहिए।
इसी प्रकार से आज विद्यालय प्रांगण में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी प्रकार से आज विद्यालय के बच्चों को जागरूक करते हुए रैली, पोस्टर चित्रकला प्रतियोगिता कराकर जागरूक किया गया। विद्यालय के बच्चों ने रैली के माध्यम से नारा लगाया की धरती बचाओ वृक्ष लगाओं, पर्यावरण बचाओं प्रदूषण हटाओं इस कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले बच्चों एवं बच्चियों को सम्मानित किया गया और कपड़े का झोला वितरण किया गया ।
Also Read: प्रतापगढ़। हरिओम मिश्र के नामांकन से बेल्हा प्रतापगढ़ से कौशाम्बी और प्रयागराज तक खुशी की लहर
वही विभाग संयोजक विनोद कुमार जालान ने बताया कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन से चिंतित है। धरती पर निरंतर बढ़ते तापक्रम से जीव और वनस्पति जगत के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन ने जीवन को प्रभावित कर दिया है। जलवायु परिवर्तन के कारण आज अतिवृष्टि,अल्प वृष्टि अनावृष्टि, सूखा,बाढ़, बादल फटना बिजली गिरना शीतलहर, तूफान,भीषण गर्मी, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक विभीषिकाओं का सामना करना पड़ रहा है। धरती पर बढ़ते तापक्रम के कारण समुद्र का जलस्तर ऊपर उठ रहा है।समुद्र के किनारे बसे नगरों के लिए खतरे की घंटी है।जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए हम अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास कर सकते हैं। पर्यावरण और प्रकृति का संरक्षण करना हमारा दायित्व है, विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से नगर प्रचारक हरेन्द्र, विनोद जालान, सुषमा पाण्डेय, प्रतिमा चौबे, उमाकांत दुबे , योगेश नारायण सिंह, निशा, सुमन जायसवाल, हरिओम पाण्डेय अश्विनी कुमार रामनारायण, रवि कुमार उपस्थित रहे।
रिपोर्ट :- रवि पाण्डेय
सोनभद्र



