Technology News- इसरो तकनीक से खोजी जाएगी वैदिक सरस्वती की धारा

Technology News- सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड इसरो की आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वैदिक सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने जा रहा है। बोर्ड गुजरात में इसरो के साथ एक महत्वपूर्ण परियोजना शुरू करने वाला है।

इसी कड़ी में सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच की अध्यक्षता में गुजरात के अहमदाबाद स्थित इसरो अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।

बैठक के दौरान सहमति बनी कि सरस्वती नदी परियोजना को गुजरात में जल्द शुरू करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही परियोजना के प्रभावी संचालन और क्रियान्वयन में तेजी लाने के उद्देश्य से एक विशेष टीम भी गठित की गई है। यह टीम विभिन्न तकनीकी, भूगर्भीय और जल संसाधन संबंधी पहलुओं पर कार्य करेगी तथा जरूरत पड़ने पर अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एजेंसियों का सहयोग भी लिया जाएगा।

सरस्वती विकास बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने बताया कि इसरो की आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट मैपिंग और भू-वैज्ञानिक अध्ययन की सहायता से सरस्वती नदी के प्राचीन मार्गों की पहचान और जल प्रवाह की संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जाएगा। इससे गुजरात और राजस्थान में सरस्वती नदी पुनर्जीवन अभियान को नई गति मिलने की उम्मीद है।

सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड द्वारा अब तक हरियाणा में विभिन्न नदियों और जल स्रोतों को जोड़ते हुए करीब 400 किलोमीटर क्षेत्र में जल प्रवाह स्थापित किया जा चुका है। अब इस अभियान को राजस्थान और गुजरात तक विस्तार देने की योजना है, ताकि प्राचीन वैदिक सरस्वती नदी के अस्तित्व को पुनः स्थापित किया जा सके।

वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद में सरस्वती नदी का 77 बार उल्लेख मिलता है। एक मान्यता के अनुसार, यह नदी उत्तराखंड के बंदरपूंछ ग्लेशियर से निकलकर हरियाणा, राजस्थान होते हुए गुजरात के रण ऑफ कच्छ तक करीब 2500 किलोमीटर क्षेत्र में प्रवाहित होती थी, लेकिन कालांतर में यह लुप्त हो गई। अब वैज्ञानिक तकनीकों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर इसे पुनर्जीवित करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

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