
uploaded by Akash Tripathi
शहर से गांव तक संचालित 80 प्रतिशत रेस्टोरेंट और होटलों व लॉज में आग से सुरक्षा के इंतजाम बिल्कुल नहीं हैं। जिन प्रतिष्ठानों में एंटी फायर उपकरण लगे हैं वह काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में यहां खाने और किराए पर रूम लेकर रहने वालों की जान खतरे में है। दर्जनों होटल और रेस्टोरेंट ऐसे संचालित हैं जिनके पास फायर विभाग की एनओसी तक नहीं हैं। जिनके प्रतिष्ठानों की एनओसी वैधता डेट समाप्त हो चुकी है, वह दोबारा विभाग से एनओसी लेना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। करीब डेढ़ वर्षों में फायर विभाग की रिपोर्ट पर एडीएम द्वारा 130 से अधिक ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस दी गई। फिर भी ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़े इन खामियों में सुधार को लेकर प्रतिष्ठानों के संचालक आगे नहीं आ रहे। दोबारा जांच और कमियों को दुरुस्त कराने के बजाय वे लोगों की जिंदगी खतरे में डालकर दौलत बटोरने में जुटे हुए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि नोटिस देकर कर्तव्य की इतिश्री समझने वाले अफसर ऐसे प्रतिष्ठानों में सील करने जैसी कोई सख्त कार्रवाई से कतरा रहे हैं। सख्त कदम उठाने से कतरा रहे अफसरों की यह खामोशी किसी दिन यहां भी दिल्ली जैसी घटना का कारण बन सकती है। यह बातें मैं आप को यूं ही डराने के लिए नहीं कह रहे हैं। दरअसल दो दिनों से होटलों व लॉज और रेस्टोरेंट में आग से सुरक्षा को लेकर जांच में जुटे फायर अफसरों की रिपोर्ट खुद-ब-खुद बयां कर रही है।
दिल्ली के होटल में आग से हुई घटना के बाद शुक्रवार को मुख्य अग्निशमन अधिकारी के नेतृत्व में फायर स्टेशन अफसर सिविल लाइंस की टीम प्रयागराज रेलवे स्टेशन गेट नंबर एक व दो साइड पहुंची। यहां खुल्दाबाद और शाहगंज रोड पर स्थित लॉज एवं होटल व रेस्टोरेंट में अग्निशमन सुरक्षा को लेकर टीम द्वारा जांच की गई। जांच टीम में शामिल अफसरों व जवानों ने जो सच्चाई बताई वह यहां आने वाले ग्राहकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बताया गया कि सबसे पहले टीम होटल गुलाब मेंसन रीवा बिल्डिंग लीडर रोड पहुंची। इसके राधेलॉज लीडर लोड, होटल श्रीकृष्णा इन, लीडर रोड, होटल श्रीराम लीडर रोड होटल नालंदा लीडर और होटल अम्बर लीडर रोड आग से सुरक्षा के मानक पर खरे नहीं उतरे। अफसरों ने कहा कि रिहायसी मकानों को कई फ्लोर बनाकर लोग लॉज व रेस्टोरेंट और होटल चला रहे हैं। इनमें एक्जिट और इंट्री के द्वार अलग-अलग नहीं है। दूसरे व तीसरे या चौथे फ्लोर तक जाने के लिए यहां बनाई गई टेरिश यानी सीढियों की चौढ़ाई एक डेढ़-दो फीट से अधिक नहीं है। जबकि सीढ़ियों की चौड़ाई कम से कम तीन से चार फीट होनी चाहिए। ताकि जरूरत पड़ने पर लोग आसानी से निकल सकें। इतना ही नहीं पाया गया कि यहां लगाए गए फायर इंस्टीग्यूशर और सिलेंडर की स्थिति ठीक नहीं है। होटल और रेस्टोरेंट हो या लॉज, अफसरों का कहना है कि एग्जिट और इंट्री डोर अलग-अलग होना चाहिए। इतना ही नहीं इमरजेंसी द्वार भी होने चाहिए। अफसरों की मानें तो इन सभी छह प्रतिष्ठानों में आग से सुरक्षा को लेकर मानक पूरे नहीं हैं। अब यह जांच रिपोर्ट फायर विभाग की ओर से एडीएम को भेजी जाएगी। एडीएम के द्वारा इन प्रतिष्ठानों के संचालकों को नोटिस दी जाएगी।
अफसरों का कोरम पूरा, काम अधूरा
फॉयर विभाग की जांच में आग से सुरक्षा को लेकर दो दिनों में जो हालात सामने आए हैं, बेहद चौंकाने वाले हैं। कहा यह जा रहा है कि विभाग सिर्फ जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे प्रतिष्ठानों व इनके संचालकों पर ठोस कार्रवाई जिम्मेदार नहीं करते। लोगों का कहना है कि अफसरों का यही रवैया ऐसे होटलओं व रेस्टोरेंट आने और लॉज में रुकने वालों की सुरक्षा से खिलवाड़़ कर रहे संचालकों के मनोबल को बढ़ावा मिल रहा है। यह बात लोग यूं ही नहीं नहीं कह रहे हैं। दरअसल पिछले डेढ़ वर्षों से फायर विभाग की रिपोर्ट के आधार पर एडीएम के द्वारा करीब 130 ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस दी गई, जहां अग्निशमन सुरक्षा के इंतजाम ठीक नहीं हैं। नोटिस देकर अफसरों ने अपनी ड्यूटी का कोरम तो पूरा कर लिया। मगर, सुधार नहीं होने के बावजूद अफसरों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय सूत्र कहते हैं कि नोटिस बाद कुछ ने अपनी पॉवर व पहुंच का धौंस दिखाकर अफसरों को घुड़क दिया तो कुछ नोटिस को रद्दी की टोकरी में डालकर सो गए। खौफनाक इस हालत के बीच बिजनेस से नोट बटोर रहे इन प्रतिष्ठानों के संचालक लोगों की सुरक्षा से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।
जांच में मिली प्रमुख खामियां
– जिन प्रतिष्ठानों में जांच हुई उनमें फायर इंस्टीग्यूशर अधिकांश में नहीं मिले।
– जहां फॉयर इंस्टीग्यूशर लगे मिले वहां तकनीकी खराबी से वे चल नहीं रहे।
– प्रतिष्ठानों में आग बुझाने वाला सिलेंडर तो है पर चलाना कोई नहीं जानता।
– आग लगने पर भागने के लिए कोई इमेरजेंसी द्वार पर भी नहीं पाया गया है।
– अफसरों की मानें तो कई को नोटिस के बावजूद आज तक सुधार नहीं किए।
– सीढ़ियों इतनी सकरी हैं कि एक साथ दो आदमी का निकल पाना मुश्किल है।
– अधिकांश का एनओसी टाइम समाप्त है, पर वे दोबारा आवेदन नहीं कर रहे हैं।होटल और रेस्टोरेंट व लॉज की जांच दस तारीख तक अनवरत चलेगी। इस बीच जिस भी प्रतिष्ठानों में खामियां पाई गई हैं या पाई जाएंगी उन्हें एडीएम के द्वारा नोटिस दी जाएगी। फिर भी सुरधार को लेकर यदि संचालक एक्टिव नहीं हुए तो आगे की विधिक कार्रवाई के लिए शीर्ष अफसरों को पत्र लिखा जाएगा। प्रतिष्ठानों को सील करने का पॉवर विभाग के पास नहीं है। यही वजह है कि तमाम लोग एनओसी की वैलिडिटी समाप्त होने के बाद दोबारा लेने के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं।
राकेश कुमार, फायर अफसर सिविलि लाइंस
रिपोर्ट : मुकेश चतुर्वेदी



