International Update: बदलते दौर में भी अडिग भारत-नेपाल के सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते

नेपाल के विदेश मंत्री की भारत यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों, डिजिटल कनेक्टिविटी और सीमा विवाद समाधान को मिली नई दिशा

International Update:  नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल भारत का अपना तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा संपन्न कर स्वदेश लौट गए। उनकी यह यात्रा भारत-नेपाल संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम मानी जा रही है। हाल के वर्षों में सीमा विवादों और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को लेकर उठी चर्चाओं के बीच यह दौरा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत संबंधों को और मजबूत तथा स्थिर बनाने के प्रयासों का प्रतीक माना जा रहा है।

अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने नई दिल्ली में अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस. जयशंकर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। मार्च 2026 में नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद विदेश मंत्री स्तर की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी।

नेपाली पक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत के साथ उनके ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हैं और उनके पास कोई “पुराना बैगेज” नहीं है। इसे दोनों देशों के बीच मौजूद कूटनीतिक दूरी को कम करने की सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

सीमा विवादों पर स्पष्ट रुख

विदेश मंत्री खनाल ने सीमा विवादों को लेकर कहा कि ऐसे सभी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से किया जाएगा तथा इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी। इसे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील विषयों पर द्विपक्षीय संवाद को प्राथमिकता देना दोनों देशों के रिश्तों में परिपक्वता और आपसी विश्वास को दर्शाता है।

डिजिटल और आर्थिक साझेदारी को नई गति

इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) के बीच पीयर-टू-पीयर (P2P) भुगतान लिंक की शुरुआत रही। इससे दोनों देशों के नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों को डिजिटल लेनदेन में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा भारत ने ‘भूकंप पुनर्निर्माण सहायता’ कार्यक्रम के तहत नेपाल को 72 स्वास्थ्य सुविधाएं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं भी सौंपीं। यह कदम दोनों देशों के बीच मानवीय और विकासात्मक सहयोग को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

द्विपक्षीय सहयोग के सभी क्षेत्रों की समीक्षा

 

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों विदेश मंत्रियों ने विकास सहयोग, कनेक्टिविटी, व्यापार एवं पारगमन, ऊर्जा, लोगों के बीच संपर्क और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। साथ ही क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत नेपाल एक प्राथमिकता वाला साझेदार देश है और यह यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली साबित हुई है।

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जयशंकर ने बताया विशेष रिश्ता

बैठक के दौरान अपने प्रारंभिक वक्तव्य में डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच संबंध बेहद विशेष हैं, जो लोगों के बीच मजबूत संपर्क, खुली सीमाओं, साझा सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि आज दोनों देशों के पास अपने संबंधों को नई दिशा देने और उनकी पूरी क्षमता को साकार करने का महत्वपूर्ण अवसर मौजूद है।

नई साझेदारी की ओर बढ़ते कदम

नई दिल्ली और काठमांडू के बीच हालिया कूटनीतिक संवाद ने यह संकेत दिया है कि दोनों देश पारंपरिक मित्रता को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप नई दिशा देना चाहते हैं। एक ओर जहां सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते दोनों देशों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल भुगतान प्रणाली, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग नई पीढ़ी की साझेदारी की नींव रख रहे हैं।

सीमा विवादों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर द्विपक्षीय समाधान की प्रतिबद्धता और डिजिटल सहयोग के नए अध्याय यह दर्शाते हैं कि भारत और नेपाल की मित्रता केवल इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप भी लगातार विकसित हो रही है।

(रिपोर्ट : शाश्वत तिवारी)

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