
Vikram-1: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में शनिवार का दिन एक नया अध्याय जोड़ गया। हैदराबाद की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 का सफल प्रक्षेपण किया। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहां निजी कंपनियां ऑर्बिटल लॉन्च करने में सक्षम हैं।
‘मिशन आगमन’ ने रचा इतिहास
Vikram-1 का पहला मिशन “Mission Aagaman” नाम से लॉन्च किया गया। यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य रॉकेट की तकनीकी क्षमताओं का परीक्षण करना और भविष्य के व्यावसायिक सैटेलाइट लॉन्च के लिए रास्ता तैयार करना है।
निजी स्पेस सेक्टर को मिली बड़ी सफलता
Vikram-1 पूरी तरह भारतीय निजी कंपनी द्वारा विकसित ऑर्बिटल-श्रेणी का लॉन्च व्हीकल है। इस सफलता से भारत के तेजी से बढ़ते स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे उपग्रहों के व्यावसायिक प्रक्षेपण में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
PM मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की अंतरिक्ष यात्रा का “ऐतिहासिक नया अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है तथा निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
क्यों खास है Vikram-1?
- भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट।
- स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित।
- श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण।
- भविष्य में कम लागत पर छोटे उपग्रहों के व्यावसायिक लॉन्च का मार्ग प्रशस्त करेगा।
- भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा मील का पत्थर।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए नया दौर
2022 में स्काईरूट ने Vikram-S के जरिए भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था। अब Vikram-1 की सफलता ने भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग को ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता वाले नए दौर में पहुंचा दिया है। इससे देश की वैश्विक स्पेस लॉन्च मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।



