
Sonam Raghuvanshi Bail Cancelled: इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने सोनम को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद बहुचर्चित हनीमून मर्डर केस एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
मेघालय सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मेघालय सरकार की उस अपील पर सुनवाई के बाद दिया, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया कि इस हत्याकांड का ट्रायल छह महीने के भीतर पूरा किया जाए।
साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो पाती है, तो सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं।
हनीमून के दौरान हुई थी राजा रघुवंशी की हत्या
राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी पिछले वर्ष 23 मई को मेघालय के सोहरा (चेरापूंजी) क्षेत्र में हनीमून मनाने गए थे। इसी दौरान दोनों लापता हो गए थे। बाद में 2 जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि सोनम रघुवंशी ने आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किराए के हमलावरों के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची थी।
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तकनीकी गलती बनी थी जमानत की वजह
सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से जमानत एक तकनीकी त्रुटि के आधार पर मिली थी। गिरफ्तारी के समय पुलिस द्वारा तैयार किए गए अरेस्ट मेमो और केस डायरी में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 का उल्लेख करने के बजाय गलती से धारा 403 लिख दी गई थी, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा मौजूद नहीं है।
निचली अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को इस आधार पर सशर्त जमानत प्रदान की थी। अदालत ने माना था कि गिरफ्तारी का सही आधार आरोपी को न बताना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है। इसके बाद 29 जून 2026 को हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था।
अब फिर होगी न्यायिक हिरासत
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। इसके बाद वह दोबारा न्यायिक हिरासत में रहेंगी और मामले का ट्रायल निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को मामले में महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है।



