
International Update: श्रीलंका के रणनीतिक महत्व वाले हंबनटोटा पोर्ट को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बंदरगाह का संचालन करने वाली चीनी कंपनी पर 12.59 करोड़ (125.9 मिलियन) श्रीलंकाई रुपये से अधिक नगर निगम कर (Municipal Assessment Tax) बकाया होने का आरोप लगा है। यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर श्रीलंका में चीन के निवेश मॉडल और उसकी आर्थिक भूमिका पर बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्टों के अनुसार, हंबनटोटा इंटरनेशनल पोर्ट ग्रुप (HIPG) पर 31 दिसंबर 2025 तक 125.9 मिलियन श्रीलंकाई रुपये का नगर निगम कर बकाया था। इस राशि में मूल टैक्स के साथ-साथ वारंट शुल्क और विलंब पर लगाया गया ब्याज भी शामिल है।
बताया गया है कि यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से सामने आई।
नगर परिषद ने भेजा था नोटिस
बकाया कर की वसूली के लिए हंबनटोटा म्युनिसिपल काउंसिल ने कंपनी को रेड नोटिस जारी किया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो श्रीलंका के नगर निगम कानून के तहत संपत्ति जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय लगभग 85.2 मिलियन श्रीलंकाई रुपये दो तिमाहियों से बकाया थे, जो बाद में बढ़कर 125.9 मिलियन श्रीलंकाई रुपये से अधिक हो गए।
कंपनी पहुंची कोर्ट
नोटिस मिलने के बाद पोर्ट प्रबंधन ने नगर परिषद की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी। अदालत से मिले एक अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल नगर परिषद को संपत्ति जब्त करने या संबंधित कार्रवाई करने से रोक दिया गया है।
बताया जा रहा है कि इस मामले की पैरवी के लिए नगर परिषद ने एक निजी लॉ फर्म को नियुक्त किया, जिसके लिए नगर निधि से 10 लाख श्रीलंकाई रुपये फीस के रूप में खर्च किए गए।
क्यों अहम है हंबनटोटा पोर्ट?
हंबनटोटा पोर्ट हिंद महासागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह है। इसका निर्माण चीनी वित्तीय सहायता से हुआ था।
बाद में श्रीलंका के ऋण संकट के दौरान सरकार कर्ज चुकाने में कठिनाई का सामना कर रही थी। इसके बाद 2017 में एक समझौते के तहत बंदरगाह के संचालन अधिकार 99 वर्षों की लीज पर चीनी कंपनी को सौंप दिए गए।
इसी वजह से यह बंदरगाह लंबे समय से चीन की ‘डेट ट्रैप डिप्लोमेसी’ (Debt Trap Diplomacy) को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, चीन इस आरोप से लगातार इनकार करता रहा है और अपने निवेश को व्यावसायिक एवं विकास आधारित सहयोग बताता है।
फिर उठे चीन के निवेश मॉडल पर सवाल
ताजा टैक्स विवाद के बाद श्रीलंका में एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि विदेशी निवेश परियोजनाओं में स्थानीय कानूनों, कर दायित्वों और प्रशासनिक जवाबदेही का पालन किस हद तक किया जा रहा है।
हालांकि, इस मामले में अदालत में सुनवाई जारी है और अंतिम कानूनी निर्णय अभी आना बाकी है।



