
National News: महाराष्ट्र के चर्चित TCS धर्मांतरण (Conversion) मामले में मुख्य आरोपी निदा खान को अदालत से जमानत मिल गई है। पांच महीने की गर्भवती होने के आधार पर कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए कहा कि किसी भी बच्चे को जेल में जन्म लेने से जुड़े सामाजिक कलंक का सामना नहीं करना चाहिए। अपने आदेश में अदालत ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का संदर्भ देते हुए कहा कि ऐसे हालात से यथासंभव बचा जाना चाहिए।
अदालत ने जमानत क्यों दी?
निदा खान को दो महीने से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 6 जुलाई को जमानत मिली थी। बाद में जारी विस्तृत आदेश में अदालत ने कहा कि आरोपी लगभग पांच महीने की गर्भवती हैं।
कोर्ट ने कहा कि यदि बच्चे का जन्म जेल में होता है, तो उसे भविष्य में सामाजिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अजन्मे बच्चे के हित, उसकी सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए जमानत देना उचित है।
अदालत ने यह भी माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसलिए आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता इस स्तर पर कम हो जाती है।
श्रीकृष्ण का दिया उदाहरण
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि भारतीय समाज में जेल में जन्म लेने से जुड़ा एक सामाजिक कलंक माना जाता है। इस संदर्भ में न्यायालय ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी बच्चे को ऐसी परिस्थितियों में जन्म लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, यदि कानून के दायरे में राहत दी जा सकती हो।
आरोप क्या हैं?
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अब तक की जांच में ऐसे प्रथमदृष्टया संकेत मिले हैं कि आरोपी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित रूप से पीड़िता का ब्रेनवॉश करने और उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से पीड़िता के सामने हिंदू धर्म और देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक बातें कही और धार्मिक परिवर्तन के लिए मानसिक दबाव बनाया।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट नहीं कहा कि आरोप सिद्ध हो चुके हैं। मामले की सुनवाई अभी जारी है और अंतिम निर्णय ट्रायल के बाद ही होगा।
क्या है पूरा मामला?
नासिक के चर्चित TCS Conversion Case में कुछ महिला कर्मचारियों पर सहकर्मी महिलाओं पर कथित धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने, धार्मिक साहित्य देने, मोबाइल फोन में धार्मिक ऐप्स इंस्टॉल कराने और यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, निदा खान इस मामले की प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरफ्तारी से पहले उन्हें छिपने में भी मदद मिली थी।
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, निदा खान और अन्य आरोपियों के खिलाफ 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल 9 एफआईआर दर्ज की गईं। फिलहाल एक मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि अन्य मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
मामला अभी विचाराधीन
यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपी पक्ष को कानून के अनुसार अपना बचाव प्रस्तुत करने का अधिकार है और आरोपों की अंतिम पुष्टि ट्रायल के बाद ही होगी।



