
955 परीक्षा केंद्रों पर हाईटेक निगरानी
पकड़े गए सभी आरोपियों को संबंधित जिलों की स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 को इस बार पूरी तरह हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न कराया गया। 2 से 4 जुलाई तक प्रदेश के 955 परीक्षा केंद्रों पर कई शिफ्टों में आयोजित परीक्षा के दौरान पहली बार व्यापक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया। एआई की मदद से विभिन्न जिलों में कुल 44 फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान की गई, जिन्हें तत्काल परीक्षा से बाहर कर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया। अब इनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संबंधित केंद्रों को तत्काल अलर्ट
परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक परीक्षा केंद्र को अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली से जोड़ा गया था। केंद्रों पर लगे एआई कैमरे लगातार अभ्यर्थियों की गतिविधियों पर नजर रखते रहे, जबकि पूरे प्रदेश की मॉनिटरिंग एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से रियल टाइम में की गई। किसी भी संदिग्ध गतिविधि, चेहरे के मिलान में अंतर या पहचान संबंधी गड़बड़ी सामने आते ही संबंधित केंद्र को तत्काल अलर्ट भेजा गया। अधिकारियों के अनुसार, एआई आधारित फेस रिकॉग्निशन और डिजिटल सत्यापन प्रणाली के कारण कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें दूसरे व्यक्ति परीक्षा देने पहुंचे थे। तकनीक ने इन फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान तुरंत कर ली, जिससे परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुए बिना कार्रवाई की जा सकी। पकड़े गए सभी आरोपियों को संबंधित जिलों की स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है।
सघनता से जाँच के बाद अभ्यर्थियों का प्रवेश
इस बार परीक्षा आयोजन में तकनीक का व्यापक उपयोग होने से नकल, प्रतिरूपण और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिला। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत रखी गई थी। प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन और डिजिटल मिलान जैसी प्रक्रियाओं को भी सख्ती से लागू किया गया। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। भविष्य में भी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में एआई आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
मेहनत का मिलेगा पूरा परिणाम
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक और एआई के उपयोग से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे। वहीं, फर्जी तरीके अपनाने वालों के लिए अब बच निकलना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। यूपीटीईटी-2026 में सामने आए 44 मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से परीक्षा की शुचिता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इस कार्रवाई को प्रदेश की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी



