
Crime News: चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई तय की है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट जमानत को बरकरार रखता है या उसे रद्द करता है।
सोनम ने कोर्ट में खुद को बताया बेगुनाह
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में सोनम रघुवंशी ने दावा किया कि उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उसने कहा कि वह जांच और ट्रायल में लगातार सहयोग कर रही है तथा उसके खिलाफ जमानत रद्द करने का कोई वैध आधार नहीं है।
सोनम ने यह भी कहा कि उसे 27 अप्रैल को जमानत मिली थी और अगले दिन रिहा कर दिया गया था। चूंकि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी नहीं बचती।
राज्य सरकार ने जमानत का किया विरोध
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यह एक बेहद गंभीर हत्या का मामला है। उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के आधारों को लेकर तकनीकी पहलू पर जमानत दी थी, जबकि रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से गिरफ्तारी के कारण दर्ज हैं।
सुनवाई के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि दस्तावेजों में एक टाइपिंग गलती हुई थी, जिसमें एक स्थान पर गलत धारा लिखी गई थी। उनका कहना था कि इस तकनीकी त्रुटि के आधार पर पूरे मामले को कमजोर नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे या नहीं, यह महत्वपूर्ण सवाल है, लेकिन पहले यह तय करना होगा कि उस आधार की कानूनी वैधता क्या है। यदि वह आधार टिकता नहीं है, तो जमानत पर उसका असर पड़ेगा।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह निश्चित रूप से गंभीर प्रकृति का मामला है। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित कर दी।
क्या है पूरा मामला?
इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी के कुछ ही दिनों बाद मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस हत्या की साजिश सोनम रघुवंशी ने रची थी। मामले में निचली अदालत ने उसकी जमानत की अर्जी तीन बार खारिज की थी। बाद में हाईकोर्ट से उसे राहत मिली, जिसके खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
14 जुलाई पर टिकी हैं सभी की नजरें
यह मामला केवल एक हाई-प्रोफाइल मर्डर केस तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर अपराधों में जमानत के कानूनी सिद्धांतों की भी परीक्षा माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का 14 जुलाई को आने वाला फैसला इस केस की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।



