
Gaurishankar Temple Sonbhadra: जनपद के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल गौरीशंकर मंदिर के सुंदरीकरण और विकास कार्य भूमि संबंधी तकनीकी बाधाओं के कारण प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत बरदहा (गौरीशंकर) की ग्राम प्रधान मीना देवी ने इस संबंध में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्राम प्रधान ने बताया कि ग्राम पंचायत बरदहा में वर्तमान समय में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। मौजा बरदहा की आराजी संख्या 121 में स्थित प्राचीन गौरीशंकर मंदिर की भूमि पर कई सह-खाताधारकों के नाम दर्ज हैं। इसी वजह से मंदिर परिसर में प्रस्तावित विकास एवं सुंदरीकरण कार्यों में बार-बार बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि गौरीशंकर मंदिर जनपद का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। पर्यटन विभाग द्वारा समय-समय पर विकास कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत की जाती है, लेकिन भूमि विवाद और सह-खाताधारकों के नाम दर्ज होने के कारण कार्य समय पर शुरू नहीं हो पाते। कई बार स्वीकृत बजट भी समय सीमा पूरी होने पर वापस चला जाता है, जिससे मंदिर के विकास की योजनाएं अधूरी रह जाती हैं।
शिकायती पत्र में बताया गया है कि आराजी संख्या 121 के कुल 1.012 हेक्टेयर क्षेत्रफल में से मंदिर परिसर का 0.443 हेक्टेयर हिस्सा चकबंदी विभाग द्वारा पहले ही चक बाहर किया जा चुका है। इसके बावजूद मंदिर परिसर पर सभी खातेदारों के नाम दर्ज होने से भविष्य में विवाद की आशंका बनी हुई है।
ग्राम प्रधान मीना देवी ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मंदिर परिसर की भूमि को अलग से केवल गौरीशंकर मंदिर के नाम सुरक्षित दर्ज कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी खातेदार उस पर स्वामित्व का दावा न कर सके। इससे पर्यटन एवं विकास संबंधी परियोजनाओं को बिना किसी कानूनी या प्रशासनिक बाधा के पूरा किया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रस्ताव पर सभी सह-काश्तकार अपनी सहमति दे चुके हैं। ऐसे में यदि प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करता है तो गौरीशंकर मंदिर के संरक्षण, सुंदरीकरण और धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने के साथ-साथ सरकार की पर्यटन विकास योजनाओं का भी प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।



