US Saudi Nuclear Deal: क्या ईरान को रोकने की कोशिश कर रहा अमेरिका? सऊदी अरब के साथ ट्रंप के परमाणु समझौते का पूरा विश्लेषण

यूरेनियम संवर्धन, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और परमाणु अप्रसार पर उठे सवाल; ईरान, इजरायल और अमेरिका के समीकरणों पर पड़ सकता है बड़ा असर

US Saudi Nuclear Deal: अमेरिका और सऊदी अरब के बीच प्रस्तावित नागरिक परमाणु सहयोग समझौता एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा इस समझौते को आगे बढ़ाने के फैसले के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका पश्चिम एशिया में ईरान के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए सऊदी अरब को नई रणनीतिक ताकत देना चाहता है। प्रस्तावित डील में सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की अनुमति मिलने की संभावना ने परमाणु अप्रसार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से नागरिक परमाणु सहयोग पर बातचीत चल रही थी। इस समझौते के जरिए सऊदी अरब को अमेरिकी परमाणु तकनीक और निवेश का लाभ मिलेगा, जबकि अमेरिकी कंपनियों को वहां परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े अनुबंध हासिल करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, सबसे अधिक विवाद इस बात को लेकर है कि समझौते में कथित तौर पर पारंपरिक “गोल्ड स्टैंडर्ड” सुरक्षा प्रावधान शामिल नहीं हैं, जिनके तहत यूरेनियम संवर्धन और इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन की पुनर्प्रक्रिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सऊदी अरब को भविष्य में अपने देश में यूरेनियम संवर्धित करने की अनुमति मिलती है, तो सैद्धांतिक रूप से उसके पास भविष्य में परमाणु हथियार विकसित करने की तकनीकी क्षमता भी विकसित हो सकती है। यही कारण है कि अमेरिका के भीतर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के कई सांसद इस समझौते को लेकर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था को लेकर भी बहस जारी है।

यह समझौता ऐसे समय सामने आया है जब ईरान का परमाणु कार्यक्रम पहले से ही अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई बार सैन्य और कूटनीतिक तनाव देखने को मिला है। ऐसे में सऊदी अरब को परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अधिक स्वतंत्रता मिलने को कई विश्लेषक ईरान के लिए एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश मान रहे हैं।

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने की योजना नहीं बना रहा, लेकिन यदि ईरान भविष्य में परमाणु बम हासिल करता है तो सऊदी अरब भी वैसा ही कदम उठाने पर विचार करेगा। इसी बयान के कारण इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता दिखाई जा रही है।

ट्रंप प्रशासन इस समझौते को व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा भी मान रहा है। खबरों के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भविष्य में अब्राहम एकॉर्ड्स के तहत इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में भी आगे बढ़े। हालांकि ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इनकार किया है कि सऊदी अरब को बिना शर्त यूरेनियम संवर्धन की अनुमति दी जाएगी।

International News: क्या न्यूयॉर्क में गिरफ्तार होंगे बेंजामिन नेतन्याहू? मेयर के बयान से बढ़ा विवाद, ट्रंप ने दिया साफ संदेश

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता लागू होता है तो अमेरिका को पश्चिम एशिया में अपने सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी देशों में से एक के साथ संबंध और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक अवसर भी मिलेंगे। दूसरी ओर, यदि यह समझौता विफल होता है तो सऊदी अरब चीन, रूस, फ्रांस या दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ परमाणु सहयोग बढ़ा सकता है। चीन की सरकारी कंपनी CNNC और रूस की रोसाटॉम पहले ही सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम में रुचि दिखा चुके हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस समझौते का तत्काल प्रभाव सीमित हो सकता है, क्योंकि सऊदी अरब को एक पूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने में एक दशक या उससे अधिक समय लग सकता है। इसके बावजूद इस डील ने परमाणु अप्रसार संधि, क्षेत्रीय हथियारों की होड़ और अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अब निगाहें अमेरिकी कांग्रेस पर टिकी हैं, जहां इस समझौते की समीक्षा होने के बाद इसे लेकर राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। यदि कांग्रेस में इसका विरोध तेज होता है तो समझौते की शर्तों में बदलाव भी संभव है। वहीं, यदि डील मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ती है तो यह पश्चिम एशिया की शक्ति राजनीति और ईरान-अमेरिका संबंधों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

Show More

Related Articles

Back to top button