FCRA Amendment Bill: अमित शाह 12 अगस्त को पेश कर सकते हैं FCRA Bill, परिसीमन पर मोदी सरकार का बड़ा प्लान

FCRA संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में पास कराने की तैयारी, 2029 चुनाव से पहले परिसीमन और महिला आरक्षण पर भी नजर

FCRA Amendment Bill: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिनों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी FCRA संशोधन विधेयक पेश कर सकते हैं। सरकार की प्राथमिकता इस बिल को मौजूदा मानसून सत्र में ही पारित कराने की बताई जा रही है। वहीं, परिसीमन को लेकर सरकार एक अलग रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। ऐसे में संसद के अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक FCRA संशोधन विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस बिल को खुद गृह मंत्री अमित शाह सदन में पेश कर सकते हैं। पूरे मानसून सत्र के दौरान अमित शाह की सदन में मौजूदगी को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। अब अगर वह खुद FCRA बिल पेश करते हैं तो यह सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर भी एक बड़ा संकेत माना जाएगा।

FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act के जरिए देश में विदेशी चंदे और विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता है। प्रस्तावित संशोधन को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है। कुछ विपक्षी दलों और संगठनों ने इसके प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई है। वहीं सरकार का कहना है कि विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को मजबूत करना राष्ट्रीय हित में जरूरी है।

हाल ही में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा और कुछ ईसाई संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान भी बिल के 12 अगस्त को संसद में पेश होने की बात सामने आई थी। संसद का मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलना है। ऐसे में सरकार के पास विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए बेहद सीमित समय बचा है।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक सरकार FCRA संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में ही पारित कराने को प्राथमिकता दे रही है। इस विधेयक को पारित कराने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त होगा। यही वजह है कि सरकार के लिए इसे पारित कराना संविधान संशोधन से जुड़े किसी विधेयक की तुलना में आसान माना जा रहा है। हालांकि बिल को लेकर विपक्ष की आपत्तियों और संभावित विरोध के कारण संसद में राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है।

FCRA के साथ-साथ परिसीमन का मुद्दा भी सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। पहले ऐसी चर्चा थी कि सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को प्राथमिकता दे सकती है। लेकिन अब संकेत हैं कि सरकार पहले FCRA विधेयक को आगे बढ़ाना चाहती है और परिसीमन के लिए नई राजनीतिक रणनीति तैयार कर रही है।

परिसीमन से जुड़ा मामला इसलिए ज्यादा जटिल है क्योंकि इसके लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी। संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना जरूरी होता है। अप्रैल 2026 में सरकार परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लाने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन वह पारित नहीं हो सका था।

अप्रैल में पेश किए गए प्रस्ताव में लोकसभा की अधिकतम सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान बताया गया था। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मौजूदा सीटों में कम से कम 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का भरोसा दिया गया था। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रस्ताव था। लेकिन दक्षिणी राज्यों में परिसीमन को लेकर पहले से ही चिंता रही है। इन राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद नई सीटों के बंटवारे में उन्हें राजनीतिक नुकसान हो सकता है।

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यही वजह है कि सरकार अब दक्षिणी राज्यों और वहां की राजनीतिक पार्टियों को एक अलग विकल्प समझाने की कोशिश कर रही है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक दक्षिणी राज्यों के सामने सवाल यह है कि वे प्रस्तावित संविधान संशोधन का समर्थन करके सीटों में कम से कम 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की गारंटी स्वीकार करें या फिर 2027 की जनगणना के बाद मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के तहत होने वाले परिसीमन का इंतजार करें।

संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 में परिसीमन को लेकर प्रावधान मौजूद हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत 2026 के बाद पहली जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। ऐसे में 2027 की जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया के लिए सीमित समय उपलब्ध होगा। इसी प्रक्रिया के साथ लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता भी खुल सकता है।

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सरकार की नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दक्षिणी राज्यों को राजनीतिक और संवैधानिक विकल्पों के बीच फैसला लेने के लिए तैयार करना बताया जा रहा है। भाजपा सूत्रों के अनुसार अगर दक्षिणी राज्यों की पार्टियां संविधान संशोधन के समर्थन के लिए तैयार होती हैं तो आने वाले महीनों में सरकार एक और विशेष सत्र बुलाने पर भी विचार कर सकती है।

फिलहाल 12 अगस्त को FCRA संशोधन विधेयक की संभावित पेशी पर सभी की नजर है। इसके बाद यह देखना अहम होगा कि सरकार परिसीमन के मुद्दे पर किस तरह विपक्ष और दक्षिणी राज्यों की पार्टियों को साथ लाने की कोशिश करती है। संसद के इस सत्र में FCRA को प्राथमिकता देना और परिसीमन के लिए आगे की रणनीति तैयार करना मोदी सरकार के अगले बड़े राजनीतिक और संवैधानिक कदमों की दिशा का संकेत दे सकता है।

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