IAS Mandeep Bhandari : जानिये कौन हैं मंदीप के. भंडारी, CBSE के बनाए गए नए चेयरमैन – 4 महीने में तीसरी बार बदला बोर्ड का प्रमुख

IAS Mandeep Bhandari : IAS अधिकारी मंदीप के. भंडारी को CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। 2001 बैच के AGMUT अधिकारी भंडारी लोकहांडे प्रशांत सीताराम की जगह लेंगे।

IAS Mandeep Bhandari : केंद्र सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी मंदीप के. भंडारी को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के आदेश के मुताबिक, 2001 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी भंडारी को शिक्षा मंत्रालय के तहत CBSE चेयरमैन की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव के रैंक और वेतनमान में यह पद दिया गया है।

मंदीप भंडारी की नियुक्ति के साथ ही पिछले करीब चार महीनों में CBSE के चेयरमैन पद पर यह **तीसरा बदलाव** है। वह लोकहांडे प्रशांत सीताराम की जगह लेंगे, जिन्हें जुलाई में CBSE चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।

कौन हैं मंदीप के. भंडारी?

मंदीप के. भंडारी 2001 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी हैं। वह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और पेशे से मेडिकल ग्रेजुएट हैं। उन्होंने MBBS की पढ़ाई की है।

CBSE चेयरमैन बनाए जाने से पहले भंडारी जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के प्रधान सचिव के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही उनके पास श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का अतिरिक्त प्रभार भी था।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, भंडारी ने 6 मार्च 2023 को उपराज्यपाल के प्रधान सचिव का पद संभाला था।

वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में करीब 9 साल काम किया

मंदीप भंडारी ने वर्ष 2009 से 2018 तक करीब एक दशक श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Additional CEO) के तौर पर काम किया।

जनवरी 2018 में वह केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर आए और उच्च शिक्षा से जुड़े केंद्रीय मंत्री के निजी सचिव के तौर पर शिक्षा मंत्रालय में जिम्मेदारी संभाली। सितंबर 2018 तक इस पद पर रहने के बाद उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय में सितंबर 2018 से जनवरी 2023 तक काम किया।

चार महीने में तीसरे CBSE चेयरमैन

CBSE में शीर्ष स्तर पर हाल के महीनों में लगातार बदलाव हुए हैं। 2 जून 2026 को सरकार ने तत्कालीन CBSE चेयरमैन राहुल सिंह को कृषि मंत्रालय भेज दिया था। इसके साथ ही लोकहांडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

हालांकि, करीब एक महीने बाद 2 जुलाई को लोकहांडे को अतिरिक्त प्रभार के रूप में CBSE चेयरमैन की जिम्मेदारी दी गई। वह गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर भी कार्यरत रहे।

अब 25 सितंबर के आदेश के बाद मंदीप भंडारी की नियमित नियुक्ति के साथ लोकहांडे का अतिरिक्त प्रभार समाप्त हो गया है।

OSM विवाद के बीच हुए CBSE में बड़े बदलाव

CBSE में लगातार नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब बोर्ड का On-Screen Marking (OSM) सिस्टम विवादों में रहा है। 2026 की कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर परीक्षकों और अधिकारियों की ओर से तकनीकी गड़बड़ियों और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं।

रिपोर्टों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग में समस्याओं, अंकों में कथित बदलाव और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की खरीद प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

इसके बाद सरकार ने OSM प्रणाली से जुड़ी सेवाओं की खरीद की जांच के लिए पूर्व केंद्रीय सचिव **एस. राधा चौहान** की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच समिति गठित की थी।

लोकहांडे को 2 जुलाई को मिला था अतिरिक्त प्रभार

2 जुलाई के आदेश में कहा गया था कि लोकहांडे प्रशांत सीताराम CBSE चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार तब तक संभालेंगे, जब तक नियमित चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हो जाती या अगला आदेश जारी नहीं होता।

25 सितंबर को मंदीप भंडारी की नियुक्ति के साथ यह अंतरिम व्यवस्था समाप्त हो गई।

इससे पहले 2 जून के आदेश में लोकहांडे को CBSE चेयरमैन के पद पर नियमित नियुक्ति दी गई थी। बाद में उन्हें अतिरिक्त प्रभार के तौर पर जिम्मेदारी दी गई।

CBSE में नेतृत्व परिवर्तन क्यों अहम?

CBSE देश के सबसे बड़े स्कूली शिक्षा बोर्डों में से एक है और लाखों विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाओं, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया से सीधे जुड़ा है। ऐसे में चेयरमैन स्तर पर लगातार हो रहे बदलावों के बीच अब मंदीप भंडारी के सामने बोर्ड की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ डिजिटल मूल्यांकन से जुड़े मुद्दों को संभालने की जिम्मेदारी होगी।

मंदीप भंडारी की प्रशासनिक पृष्ठभूमि में शिक्षा, स्वास्थ्य, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और बड़े धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े अनुभव शामिल हैं।

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