
Badrinath Donation Scam: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब और व्यापक हो गई है। दानपात्रों में जमा चढ़ावे की गणना में सामने आई गड़बड़ियों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) से पिछले तीन वर्षों के दान और खजाने का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।
अब केवल नकदी ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोना, चांदी, हीरे, माणिक और अन्य बहुमूल्य आभूषणों का भी आधिकारिक अभिलेखों से मिलान किया जाएगा।
क्या है ‘कुबेर का खजाना’?
धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान बदरीनाथ के खजांची कुबेर महाराज माने जाते हैं। मंदिर परिसर में मौजूद 26 दानपात्रों से प्राप्त नकदी और कीमती वस्तुओं की गणना के बाद उन्हें सुरक्षित बॉक्स में रखकर रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इसी सुरक्षित संग्रह को स्थानीय स्तर पर ‘कुबेर का खजाना’ कहा जाता है।
पुलिस अब इसी रिकॉर्ड की विस्तार से जांच कर यह पता लगाएगी कि दर्ज अभिलेख और वास्तविक जमा संपत्ति में कोई अंतर तो नहीं है।
विशेषज्ञ लेखाकार करेगा रिकॉर्ड का मिलान
जांच को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने एक विशेषज्ञ लेखाकार को भी बदरीनाथ भेजा है। विशेषज्ञ मंदिर के वित्तीय दस्तावेजों, नकदी और बहुमूल्य आभूषणों के रिकॉर्ड का बारीकी से मिलान करेगा, ताकि किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी सामने आने पर उसे प्रमाणित किया जा सके।
मुख्य आरोपी की कस्टडी रिमांड नहीं मिली
इस मामले में मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल को पुलिस कस्टडी में लेकर पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल पुलिस की कस्टडी रिमांड की मांग स्वीकार नहीं की। इसके चलते पुलिस अब उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
पूर्व मंदिर अधिकारी न्यायिक हिरासत में
मामले में गिरफ्तार पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
जांच में क्या-क्या होगा?
पुलिस की जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर फोकस रहेगा—
- पिछले तीन वर्षों के दान का पूरा रिकॉर्ड।
- नकदी और वास्तविक जमा राशि का मिलान।
- सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का सत्यापन।
- दानपात्रों की गणना प्रक्रिया की जांच।
- संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका।
जांच एजेंसियों का मानना है कि रिकॉर्ड की गहन पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित हेराफेरी का दायरा कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।



