
Abhijit Dipke Ink Attack:: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके पर स्याही फेंकने की घटना के बाद विवाद और गहरा गया है। स्याही फेंकने वाली बरखा त्रेहान, जो खुद को पुरुष अधिकार कार्यकर्ता बताती हैं, ने घटना के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं।
बरखा त्रेहान ने दावा किया कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने केवल विरोध दर्ज कराने के लिए अभिजीत दिपके पर स्याही फेंकी। उनके अनुसार, कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम और माता सीता का मजाक उड़ाया जा रहा था, जिसका उन्होंने विरोध किया।
समर्थकों पर लगाए गंभीर आरोप
बरखा ने आरोप लगाया कि स्याही फेंकने के बाद अभिजीत दिपके के समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की। उनका कहना है कि उनके बाल खींचे गए और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी मदद की।
‘सोनम वांगचुक से बात करने गई थी’
बरखा त्रेहान ने कहा कि वह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मिलने और उन्हें यह बताने गई थीं कि उनका इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हिंसा करना नहीं था, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना था।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना उस समय हुई जब अभिजीत दिपके अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर रहे थे। इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।
पुलिस के अनुसार, संबोधन के दौरान बरखा त्रेहान मंच के पास पहुंचीं और अभिजीत दिपके पर नीली स्याही फेंक दी। इसके बाद कार्यक्रम कुछ समय के लिए बाधित हो गया और वहां मौजूद स्वयंसेवकों ने उन्हें पकड़ लिया।
घटना के बाद अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों से शांत रहने की अपील की और कहा, “नीला मेरा रंग है। जय भीम।”
नोट: इस खबर में बरखा त्रेहान द्वारा लगाए गए आरोप उनके दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।


