
National News: पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में 150वें कोर्स की भव्य पासिंग आउट परेड का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड का निरीक्षण किया और पासआउट होने वाले कैडेट्स को संबोधित करते हुए प्रेरणादायक संदेश दिया।
अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह अवसर उनके लिए बेहद भावुक और गर्व का क्षण है, क्योंकि करीब 42 वर्ष पहले उन्होंने भी इसी परेड ग्राउंड से अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि एनडीए में जो मूल्य, अनुशासन और नेतृत्व की भावना विकसित होती है, वह पूरी जिंदगी साथ रहती है।
सेना प्रमुख ने परेड में शामिल सभी कैडेट्स, प्रशिक्षकों और पुरस्कार विजेताओं की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली स्क्वाड्रन और मित्र देशों से आए विदेशी कैडेट्स को बधाई देते हुए कहा कि एनडीए केवल सैन्य प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मित्रता और साझा मूल्यों का भी प्रतीक है।
वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक दौर में खतरे पारंपरिक रूप में सामने नहीं आते। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में सैन्य अधिकारियों को तकनीकी रूप से सक्षम, सतर्क और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने वाला होना चाहिए। उन्होंने हालिया अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सैन्य क्षमता और राष्ट्रीय शक्ति का प्रदर्शन दुनिया के सामने मजबूती से हुआ है।
उन्होंने युवा अधिकारियों को तीन महत्वपूर्ण गुण अपनाने की सलाह दी—सकारात्मक रवैया, परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता और पेशेवर दक्षता। सेना प्रमुख ने कहा कि यही गुण भविष्य में उन्हें एक सफल सैन्य नेता बनाएंगे।
महिला कैडेट्स की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और सैन्य सेवाओं में भी उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा और कर्तव्य के मार्ग में लिंग का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि समर्पण और योग्यता ही सबसे महत्वपूर्ण होती है।
अपने संबोधन के अंत में जनरल द्विवेदी ने ‘सेवा परमो धर्मः’ के मूल मंत्र को दोहराते हुए कैडेट्स से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्दी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का प्रतीक है।
एनडीए की पासिंग आउट परेड भारतीय सैन्य परंपरा का एक प्रतिष्ठित आयोजन माना जाता है, जहां से हर वर्ष सैकड़ों युवा अधिकारी बनकर थलसेना, नौसेना और वायुसेना में राष्ट्र सेवा के लिए आगे बढ़ते हैं।



