
National News: कर्नाटक की राजनीति में पिछले कई महीनों से जारी सस्पेंस अब लगभग खत्म होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है और अब डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।
गुरुवार, 28 मई को सिद्धारमैया ने कर्नाटक के राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर को अपना इस्तीफा सौंपा था। हालांकि उस समय राज्यपाल थावरचंद गहलोत राजस्थान के दौरे पर थे, जिसके कारण इस्तीफा मंजूर होने को लेकर सस्पेंस बना हुआ था। लेकिन अब राज्यपाल ने औपचारिक रूप से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे सिद्धारमैया
राज्यपाल ने नई सरकार के गठन तक सिद्धारमैया को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभालने को कहा है। ऐसे में अब कांग्रेस नेतृत्व नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में जुट गया है।
नई सरकार के गठन की कवायद तेज
कर्नाटक में नई सरकार को लेकर बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक की तैयारियां चल रही हैं, जबकि पार्टी के दोनों बड़े नेता सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली पहुंच चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया इस्तीफा देने के बाद जयपुर के रास्ते दिल्ली पहुंचे। वहीं डीके शिवकुमार भी बेंगलुरु से सीधे राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात कर मंत्रिमंडल और सत्ता परिवर्तन के फॉर्मूले पर अंतिम चर्चा करेंगे।
‘ढाई-ढाई साल’ फॉर्मूले पर आगे बढ़ी कांग्रेस
कर्नाटक में मई 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के समय से ही सत्ता साझेदारी को लेकर चर्चाएं थीं। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला तय हुआ था।
इसके तहत पहले ढाई साल सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहने वाले थे, जबकि अगले ढाई साल के लिए डीके शिवकुमार को जिम्मेदारी मिलनी थी। हालांकि कांग्रेस ने कभी इस फॉर्मूले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन अब नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।
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डीके शिवकुमार के सामने बड़ी चुनौती
अगर डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो उनके सामने सरकार और संगठन दोनों को संतुलित रखने की बड़ी चुनौती होगी। उन्हें 2028 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ गुटबाजी को भी नियंत्रित करना होगा।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में किसी भी तरह का बड़ा राजनीतिक संकट टालना चाहता है, इसलिए सत्ता परिवर्तन को पूरी रणनीति और सहमति के साथ अंजाम दिया जा रहा है।
Written By: Ekta Verma



