
IMF India GDP Warning: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अहम चेतावनी जारी की है। IMF के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के सामने दो सबसे बड़े जोखिम कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून हैं। संस्था का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है और अल-नीनो का असर मानसून पर बना रहता है, तो इसका सीधा असर भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर पड़ सकता है।
तेल की कीमतें बढ़ना सबसे बड़ी चिंता
भारत और भूटान के लिए IMF के वरिष्ठ रेजिडेंट प्रतिनिधि अनिल सालगाडो ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। चूंकि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और विकास दर पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है, तो ऊर्जा लागत में वृद्धि से भारत की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
कमजोर मानसून भी बढ़ा सकता है मुश्किलें
IMF ने अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून को भी बड़ा जोखिम बताया है। संस्था के अनुसार, मानसून में शुरुआती देरी हुई थी और हालांकि जुलाई में स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन पूरे सीजन का असर अभी स्पष्ट नहीं है।
कमजोर बारिश का असर कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
GDP ग्रोथ अनुमान में किया बदलाव
IMF ने हाल ही में भारत की 2026-27 की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। वहीं 2027-28 के लिए अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया गया है। संस्था का मानना है कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद मध्यम अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि बनाए रख सकती है।
राष्ट्रीय आय के आंकड़ों की होगी समीक्षा
IMF ने यह भी कहा कि वह इस वर्ष भारत के राष्ट्रीय आय (National Accounts) के आंकड़ों की गुणवत्ता का दोबारा मूल्यांकन करेगा। यह समीक्षा नए 2022-23 बेस ईयर और संशोधित आर्थिक आंकड़ों के आधार पर की जाएगी।
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पिछले वर्ष IMF ने भारत के राष्ट्रीय आय आंकड़ों को लेकर कुछ तकनीकी कमियों की ओर संकेत किया था। इनमें पुराने बेस ईयर का उपयोग, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर अधिक निर्भरता और कुछ सांख्यिकीय तरीकों से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
भारत ने सुधार के लिए उठाए कदम
IMF के अनुसार, भारत सरकार ने इन कमियों को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इनमें 2022-23 को नया बेस ईयर बनाना, अधिक सटीक मूल्य सूचकांकों का उपयोग, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में डबल डिफ्लेशन पद्धति लागू करना तथा प्रशासनिक और डिजिटल डेटा के उपयोग को मजबूत करना शामिल है।
IMF का मानना है कि ये सुधार भविष्य में भारत के आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे।



