IAS Rinku Singh Rahi: ‘काम 4 घंटे का है तो आधी सैलरी दीजिए’, IAS रिंकू सिंह राही का सरकार को पत्र, बोले- जहां नियम से काम हो, वहां भेज दीजिए

IAS Rinku Singh Rahi: उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर अपने पत्र को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने राज्य सरकार को लिखे ताजा पत्र में कहा है कि यदि उन्हें प्रतिदिन केवल चार घंटे का ही काम दिया जा रहा है तो उन्हें पूरी नहीं, बल्कि आधी सैलरी दी जाए। साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि यदि संभव हो तो उनकी पोस्टिंग ऐसी जगह की जाए, जहां उन्हें नियमों के अनुसार पूरा प्रशासनिक कार्य करने का अवसर मिल सके। यह मामला पिछले कई महीनों से उनके द्वारा काम के अभाव को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों की कड़ी माना जा रहा है।

क्या कहा पत्र में?

रिंकू सिंह राही ने कहा कि बिना पर्याप्त जिम्मेदारी के पूरा वेतन लेना उन्हें नैतिक रूप से उचित नहीं लगता। उनका कहना है कि यदि सरकार उन्हें सीमित कार्य ही देना चाहती है, तो वेतन भी उसी अनुपात में तय किया जाए। दूसरी ओर, यदि सरकार चाहे तो उन्हें ऐसी जिम्मेदारी सौंपी जाए, जहां वे अपनी क्षमता और नियमों के अनुसार पूर्णकालिक सेवा दे सकें।

पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा

यह पहला मौका नहीं है जब रिंकू सिंह राही ने काम के अभाव का मुद्दा उठाया हो। इससे पहले भी उन्होंने लंबे समय तक कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं मिलने पर असंतोष जताया था। उन्होंने पहले राष्ट्रपति को लिखे पत्र में भी कहा था कि बिना सार्थक कार्य के वेतन लेना उन्हें स्वीकार नहीं है और इसे उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर समस्या बताया था।

कौन हैं रिंकू सिंह राही?

रिंकू सिंह राही उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारियों में गिने जाते हैं। IAS बनने से पहले वह PCS अधिकारी रहे और भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के कारण चर्चा में आए थे। वर्ष 2009 में उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसके बाद भी उन्होंने सार्वजनिक सेवा जारी रखी। बाद में UPSC परीक्षा पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए।

अब सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

रिंकू सिंह राही के इस नए पत्र के बाद अब सबकी नजर उत्तर प्रदेश सरकार के अगले कदम पर है। फिलहाल सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, प्रशासनिक हलकों में इस पत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह मामला एक बार फिर सरकारी कार्यप्रणाली एवं अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

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