
Najaf Ashraf : हिंदुस्तान के प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने नजफ-ए-अशरफ में मरजा-ए-तकलीद ग्रैंड आयतुल्लाह हाफिज बशीर हुसैन नजफी से खास मुलाकात की। इस दौरान अरबईन, जायरीन की अहमियत और भारतीय शिया समुदाय में उच्च शिक्षा के प्रसार समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
अरबईन के जायरीन की अहमियत पर चर्चा
मुलाकात के दौरान आयतुल्लाह हाफिज बशीर हुसैन नजफी ने हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के 72 शोहदा के चेहलुम यानी अरबईन के लिए इराक और विशेष रूप से कर्बला-ए-मुअल्ला पहुंचने वाले जायरीन की अहमियत पर प्रकाश डाला।
उन्होंने जायरीन-ए-अरबईन की धार्मिक आस्था, उनकी सेवाओं और हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति उनकी वाबस्तगी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस धार्मिक यात्रा के रूहानी और दीनी पहलुओं पर भी चर्चा की।
भारतीय शिया समुदाय में शिक्षा के प्रसार पर जोर
मुलाकात के दौरान हिंदुस्तानी शिया मिल्लत में उच्च शिक्षा के प्रसार के मुद्दे पर भी विस्तार से बातचीत हुई। आयतुल्लाह बशीर हुसैन नजफी ने नई पीढ़ी को दीनी और आधुनिक शिक्षा से लैस करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समुदाय की तरक्की और नौजवानों के बेहतर भविष्य के लिए तालीम को प्राथमिकता देना जरूरी है। दीनी शिक्षा के साथ आधुनिक ज्ञान हासिल करने को भी नई पीढ़ी के विकास के लिए अहम बताया गया।
मौलाना यासूब अब्बास ने पेश किया खिराज-ए-तहसीन
मुलाकात के अंत में मौलाना यासूब अब्बास ने आयतुल्लाह हाफिज बशीर हुसैन नजफी की इल्मी और दीनी सेवाओं की सराहना की। उन्होंने मिल्लत-ए-तशय्यो की रहनुमाई और सरपरस्ती में उनकी सेवाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए खिराज-ए-तहसीन पेश किया।
मुलाकात में अरबईन के अवसर पर इराक पहुंचने वाले जायरीन, धार्मिक शिक्षा और भारतीय शिया समुदाय से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।



