
UNSC Reform : भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मौजूदा संघर्षों तथा खतरों से निपटने में परिषद की असमर्थता सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट करती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में आयोजित L.69 कंसल्टेटिव मिनिस्टीरियल इंटरैक्शन की सह-अध्यक्षता की। उनके साथ सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट भी बैठक की सह-अध्यक्षता कर रहे थे।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में हो रहे “अभूतपूर्व बदलावों” का सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र से वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने की उम्मीद की जाती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था इन अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतर रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि UN सुरक्षा परिषद का अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जारी संघर्षों और खतरों से निपटने में असमर्थ होना सुधार की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है।
भारत ने UNSC सुधार में देरी पर जताई चिंता
भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार लागू करने में लगातार हो रही देरी ऐतिहासिक अन्याय को बनाए रखती है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें विकासशील देशों की अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।
जयशंकर ने कहा कि सीधे तौर पर प्रभावित हितधारक होने के नाते L.69 और C-10 के सदस्य देश UNSC सुधार के लिए एकजुट होकर प्रयास कर रहे हैं।
क्या है L.69 समूह?
L.69 समूह में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन, एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र के विकासशील देश शामिल हैं। ये देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और अधिक प्रतिनिधित्व की दिशा में साझा प्रयास करते हैं।
जयशंकर ने अपने संबोधन में C-10 का भी उल्लेख किया। यह अफ्रीकी संघ से जुड़ा समूह है, जो अफ्रीकी देशों की साझा प्राथमिकताओं और सुरक्षा परिषद सुधार से संबंधित प्रयासों में भूमिका निभाता है।
UN महासभा के 81वें सत्र में भारत का प्रतिनिधिमंडल
जयशंकर रविवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे और वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दौरान भारत की ओर से बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
भारत का कहना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत है।



