
Disha Salian Case : शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के ₹500 करोड़ के मानहानि नोटिस का जवाब देते हुए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। ठाकरे ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को ‘निराधार’ बताया और कहा कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट में सतीश सालियान का नाम तक नहीं लिया गया था।
आदित्य ठाकरे की ओर से उनके वकील अंशुमान सिन्हा के माध्यम से यह जवाब भेजा गया। सतीश सालियान ने 17 सितंबर को नोटिस भेजकर आरोप लगाया था कि आदित्य ठाकरे ने 16 सितंबर को अंग्रेजी और मराठी में X पर किए गए दो पोस्ट के जरिए उन्हें बदनाम किया।
आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?
ठाकरे ने अपने जवाब में अपने पहले के उस सार्वजनिक बयान को दोहराया कि वह दिशा सालियान से कभी मिले या उन्हें जानते नहीं थे। जवाब में कहा गया कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट में सतीश सालियान के बारे में कोई मानहानिकारक बयान नहीं दिया गया।
ठाकरे के जवाब के मुताबिक, उनके पोस्ट का उद्देश्य राजनीतिक लोगों, कथित निहित स्वार्थों और मीडिया के कुछ वर्गों की ओर से दिशा सालियान मामले से उनका नाम जोड़ने के अभियान पर सवाल उठाना था। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े दो SIT जांचों में सत्यापित सबूतों के संदर्भ में बात की गई थी।
जवाब में यह भी कहा गया कि असली चिंता इस त्रासदी के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर है।
सतीश सालियान के दावों पर भी उठाए सवाल
आदित्य ठाकरे की ओर से भेजे गए जवाब में सतीश सालियान के 2020 में बेटी की मौत के तुरंत बाद दिए गए बयान और बाद के बयानों के बीच कथित तौर पर अंतर होने का भी उल्लेख किया गया।
ठाकरे ने कहा कि आधिकारिक पुनः जांच को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए और CBI को मामले की स्वतंत्र जांच करनी चाहिए। जवाब में यह भी कहा गया कि उनकी ओर से न तो माफी मांगी जाएगी और न ही किसी तरह के मुआवजे का भुगतान किया जाएगा।
क्या है दिशा सालियान मामला?
28 वर्षीय दिशा सालियान ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर के तौर पर कुछ समय काम किया था। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी।
इसके करीब एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर बाद में कई तरह के दावे और अटकलें सामने आईं।
मुंबई पुलिस ने दिशा सालियान की मौत के मामले में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस की जांच के बाद इसे आत्महत्या बताया गया था।
CBI ने दर्ज की FIR
रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने हाल में इस मामले में FIR दर्ज की है। अदालत के निर्देश में स्पष्ट किया गया था कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से किए गए दावों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।



