
JPSC-JSSC Protest: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी है। इसी बीच प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक अन्य गुट की राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई। देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले ‘JPSC-JSSC न्याय’ गुट के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। बातचीत के बाद छात्रों ने इसे सकारात्मक जरूर बताया, लेकिन साफ कर दिया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच यह बैठक शनिवार सुबह करीब 11:20 बजे शुरू हुई। बातचीत राज्य गेस्ट हाउस में हुई, जहां छात्रों के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और भर्ती व्यवस्था को लेकर अपनी बात सरकार के सामने रखी। बैठक खत्म होने के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल आंदोलन स्थल पर वापस पहुंचा। प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन अभी उनकी सभी मांगें स्वीकार नहीं हुई हैं। इसलिए आंदोलन जारी रहेगा।
बैठक के बाद झारखंड सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार अलग-अलग छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से बातचीत जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी एक समूह तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सभी छात्र समूहों और परीक्षा से जुड़े लोगों की बातें सुनी जाएंगी। सरकार की ओर से छात्रों और अन्य संबंधित लोगों के सुझाव लेने के लिए एक ईमेल आईडी भी जारी की गई है। सरकार का कहना है कि मिलने वाले सुझावों और शिकायतों के आधार पर सुधार की नीति तैयार करने तथा सामूहिक रूप से निर्णय लेने की कोशिश की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को समझना चाहती है और अलग-अलग पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो सुझाव और शिकायतें ईमेल के जरिए सरकार तक पहुंचेंगी, उन पर विचार किया जाएगा। सरकार के इस रुख के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों पर लिखित या ठोस कार्रवाई की मांग दोहराई है।
छात्रों के ‘JPSC-JSSC न्याय’ गुट की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करना शामिल है। इसके अलावा छात्र परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जांच ऐसी एजेंसी या व्यवस्था से होनी चाहिए, जिस पर निष्पक्षता को लेकर कोई सवाल न उठे। आंदोलनकारी छात्र JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग भी कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना होगा। यही वजह है कि बातचीत के बाद भी छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपना प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
इस आंदोलन को लेकर छात्रों के अलग-अलग गुटों के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। शुक्रवार रात भी छात्रों के एक अन्य समूह की सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई थी। इसके बाद शनिवार को देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले ‘JPSC-JSSC न्याय’ गुट के प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से मुलाकात की। अलग-अलग छात्र समूहों के साथ बातचीत के बीच सरकार की ओर से सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
JPSC-JSSC विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी परीक्षा में कथित धांधली के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इससे छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक दबाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इधर, छात्रों ने सरकार को आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति भी बता दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर रविवार तक उनकी प्रमुख मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं हुआ तो 10 अगस्त को विधानसभा मार्च का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित तरीके से किया जाएगा। यानी सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होने के बावजूद फिलहाल गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
छात्रों का आंदोलन अब 15वें दिन में पहुंच चुका है। लगातार जारी प्रदर्शन ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार जहां बातचीत और सुझावों के जरिए समाधान निकालने की बात कह रही है, वहीं प्रदर्शनकारी छात्र ठोस कार्रवाई पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च पर है।



