Pratapgarh News: प्रतापगढ़ को मिलेगी बड़ी सौगात? सदन में अमरपाल मौर्य ने उठाई श्रीराम दर्शन रेल कॉरिडोर की मांग

अयोध्या से चित्रकूट तक धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले रेल कॉरिडोर की मांग से प्रतापगढ़ में पर्यटन और रोजगार की उम्मीद बढ़ी।

Pratapgarh News: बेल्हा की माटी के लाल और राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य ने जनपद प्रतापगढ़ के चतुर्मुखी विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मांग सदन में उठाई है। सांसद ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या, प्रयाग और बुंदेलखंड क्षेत्र को जोड़ने वाले प्रस्तावित ‘श्रीराम दर्शन रेल पथ कॉरिडोर’ के निर्माण की मांग संसद में रखी। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर है।

सांसद अमरपाल मौर्य ने सदन में कहा कि इस तरह का रेल कॉरिडोर केवल यात्रियों के आवागमन को आसान बनाने वाली परियोजना नहीं होगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को एक साथ जोड़ने का काम करेगा। प्रस्तावित रेल मार्ग के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक स्थित प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचने में काफी सुविधा मिल सकती है।

प्रस्ताव के मुताबिक ‘श्रीराम दर्शन रेल पथ कॉरिडोर’ अयोध्या से शुरू होकर सुल्तानपुर, अमेठी के भादर मां और कालिका देवी धाम होते हुए प्रतापगढ़ पहुंचेगा। इसके बाद यह मार्ग प्रतापगढ़ के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों मां चंडिका देवी धाम, घुइसरनाथ धाम, जगद्गुरु स्वामी करपात्री जी महाराज की जन्मस्थली और जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की जन्मस्थली मनगढ़ धाम को जोड़ने का काम करेगा। आगे यह रेल मार्ग प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम, कौशांबी के कड़ा धाम और मंझनपुर होते हुए चित्रकूट के राजापुर तथा चित्रकूट धाम तक पहुंचाने की परिकल्पना की गई है।

सांसद की ओर से रखे गए इस प्रस्ताव में धार्मिक स्थलों के साथ-साथ उन स्थानों को भी शामिल किया गया है, जिनका संबंध भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और साहित्य से रहा है। अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में देश और दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। वहीं श्रृंगवेरपुर धाम का संबंध रामायण काल से जोड़ा जाता है। इसी तरह चित्रकूट भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है। तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर भी इस पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रतापगढ़ के लिहाज से इस प्रस्ताव को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जिले में पहले से ही कई प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल मौजूद हैं, लेकिन बेहतर परिवहन सुविधा के अभाव में इन स्थानों तक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की पहुंच आसान नहीं हो पाती। अगर प्रस्तावित रेल कॉरिडोर को मंजूरी मिलती है और इसका निर्माण होता है तो प्रतापगढ़ के धार्मिक स्थलों को व्यापक स्तर पर पहचान मिल सकती है।

मां चंडिका देवी धाम, घुइसरनाथ धाम और मनगढ़ धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का सीधा फायदा श्रद्धालुओं को मिल सकता है। खासकर त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोग इन स्थानों पर पहुंचते हैं। ऐसे में एक बेहतर और सीधे रेल संपर्क से यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भरता कम हो सकती है और आवागमन अधिक सुविधाजनक बन सकता है।

इस प्रस्ताव का असर केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। सांसद की ओर से इसे क्षेत्र के आर्थिक विकास से भी जोड़कर देखा गया है। किसी भी बड़े पर्यटन और परिवहन प्रोजेक्ट के निर्माण से स्थानीय स्तर पर होटल, भोजनालय, परिवहन, छोटे व्यापार, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों की आय में भी वृद्धि की संभावना रहती है।

प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की बात भी कही गई है। रेल परियोजना के निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ परिवहन, पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों के क्षेत्र में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं। इससे खासकर स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

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सांसद अमरपाल मौर्य की इस मांग को स्थानीय स्तर पर क्षेत्र के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि प्रतापगढ़ को अयोध्या, प्रयागराज और चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों से सीधे जोड़ने की पहल जिले की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे प्रतापगढ़ की धार्मिक पहचान को भी व्यापक स्तर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी।

स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है तो प्रतापगढ़ के कई ऐसे धार्मिक स्थल, जो अभी मुख्य रूप से स्थानीय और आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं तक सीमित हैं, राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

सांसद की ओर से सदन में उठाई गई इस मांग के बाद अब निगाहें केंद्र सरकार की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रस्तावित रेल कॉरिडोर को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और परियोजना को लेकर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल इस मांग ने प्रतापगढ़ के विकास को लेकर एक नई उम्मीद जरूर जगाई है।

अगर अयोध्या से चित्रकूट तक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ने वाला यह रेल कॉरिडोर आकार लेता है तो यह उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना साबित हो सकता है। इससे न केवल श्रद्धालुओं का आवागमन आसान होगा, बल्कि प्रतापगढ़ समेत पूरे क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है। सांसद अमरपाल मौर्य की इस पहल को लेकर उनके समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।

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