
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर मंगलवार को CID (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) की टीम पहुंची। जांच एजेंसी विधानसभा से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच कर रही है और इसी सिलसिले में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को तीसरा नोटिस सौंपा गया है।
CID अधिकारियों के आवास पहुंचने की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जांच टीम को ममता बनर्जी के आवास के अंदर जाते देखा गया। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।
अभिषेक बनर्जी को तीसरा नोटिस
जानकारी के मुताबिक CID ने अभिषेक बनर्जी को इससे पहले भी दो बार नोटिस जारी किया था। पहले नोटिस पर उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद उन्हें 8 जून को भवानी भवन स्थित CID मुख्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह वहां भी नहीं पहुंचे।
जब निर्धारित तिथि पर अभिषेक बनर्जी पेश नहीं हुए तो जांच एजेंसी ने तीसरी बार नोटिस जारी किया। इसी क्रम में CID की टीम मंगलवार को सीधे उनके आवास और पार्टी कार्यालय पहुंची, जहां उन्हें औपचारिक रूप से नोटिस सौंपा गया।
क्या है पूरा फर्जी हस्ताक्षर मामला?
यह विवाद 6 मई को ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर आयोजित TMC विधायकों की बैठक से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिस पर लगभग 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया।
हालांकि बाद में TMC के दो विधायकों—ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा—ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दावा किया कि प्रस्ताव पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। दोनों विधायकों ने यह भी कहा कि वे उस बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे।
इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया और इसकी जांच CID को सौंप दी गई।
जांच में क्या सामने आया?
सूत्रों के अनुसार CID अब तक 13 TMC विधायकों के बयान दर्ज कर चुकी है। इनमें से कुछ विधायकों ने कथित तौर पर कहा है कि दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। यही वजह है कि जांच एजेंसी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की पड़ताल कर रही है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि फर्जी हस्ताक्षरों की पुष्टि होती है तो यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी मामला बन सकता है। ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
CID की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही कई मुद्दों को लेकर गरमाई हुई है। विपक्ष इस मामले को लेकर राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में कोई बड़ा खुलासा होता है तो इसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है। खासकर तब, जब मामला सीधे तौर पर TMC नेतृत्व और पार्टी के शीर्ष नेताओं से जुड़ा दिखाई दे रहा हो।
आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजरें CID की अगली कार्रवाई और अभिषेक बनर्जी के रुख पर टिकी हुई हैं। क्या वह जांच एजेंसी के सामने पेश होंगे? क्या फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप सही साबित होंगे? और क्या यह मामला तृणमूल कांग्रेस के लिए नई राजनीतिक मुश्किलें खड़ी करेगा?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेंगे। लेकिन इतना तय है कि ममता बनर्जी के आवास तक CID की पहुंच ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
Written By: Ekta Verma



