अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मृत्यु के बाद एक बार फिर वकीलों और डॉक्टरों के बीच चल रहा विवाद गरमा गया। सोमवार को डॉक्टर मुईन खान की गिरफ्तारी की खबर तेजी से फैलने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालांकि देर शाम तक पुलिस ने किसी भी डॉक्टर की गिरफ्तारी से इनकार किया, लेकिन अफवाह के चलते दोनों पक्षों ने अलग-अलग स्थानों पर धरना-प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
सुबह से ही बंद रही ओपीडी
सुबह से ही स्वरूपरानी अस्पताल में डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं बंद कर दीं और स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए। डॉक्टरों का कहना था कि उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का प्रयास किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में चिकित्सक एकत्र रहे और प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर करते रहे। ओपीडी बंद रहने से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत को लेकर अधिवक्ताओं में भी गहरा आक्रोश देखने को मिला। बड़ी संख्या में वकील हाईकोर्ट परिसर स्थित भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने न्याय की मांग उठाई और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। धरने में शामिल अधिवक्ता काफी भावुक और व्यथित नजर आए। उनका कहना था कि जागृति शुक्ला की मृत्यु केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था से जुड़े पूरे अधिवक्ता समाज की पीड़ा का विषय है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायलय के आदेश की अवहेलना
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी कर सभी बार एसोसिएशनों और अधिवक्ताओं को सूचित किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में धरना-प्रदर्शन, हड़ताल अथवा न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं की जाएगी। परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी बार एसोसिएशन, उसके पदाधिकारियों अथवा किसी अधिवक्ता द्वारा न्यायिक कार्य बाधित किया जाता है या सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है, तो इसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित संस्था अथवा व्यक्ति स्वयं इसके लिए उत्तरदायी होगा।

पूरे दिन होती रही गिरफ्तारी की चर्चा, पुलिस ने नकारा
इस बीच डॉक्टर मुईन खान की गिरफ्तारी को लेकर पूरे दिन तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। मामले की सच्चाई जानने के लिए जब कोतवाली इंस्पेक्टर जितेंद्र शुक्ला से संपर्क किया गया तो उन्होंने गिरफ्तारी की खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘शाम छह बजे तक किसी भी डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं की गई है। इंस्पेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने यह भी बताया कि वह स्वयं उस समय स्वरूप रानी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मौजूद थे और स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए थे। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि के किसी भी सूचना पर विश्वास न करें और अफवाहों से बचें। विरोध प्रदर्शनों, प्रशासनिक सतर्कता और गिरफ्तारी की अफवाहों के बीच शहर का माहौल तनावपूर्ण बना रहा। खबर लिखे जाने तक किसी भी डॉक्टर की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। वहीं जागृति शुक्ला की मौत को लेकर अधिवक्ताओं और चिकित्सकों के बीच बढ़ता टकराव प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्ट : आकाश त्रिपाठी


