
TMC Crisis : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी अब संगठन को टूटने से बचाने के लिए सीधे मैदान में उतर गई हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने पिछले दो दिनों में कई बागी और असंतुष्ट विधायकों से व्यक्तिगत रूप से फोन पर बातचीत की है और उन्हें शुक्रवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तब तेज हो गई जब निष्कासित विधायक रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने दावा किया कि TMC के 80 में से 58 विधायक उनके साथ हैं। इसी समर्थन के आधार पर रिताब्रत गुट ने विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार भी कर लिया।
वरिष्ठ सांसदों को सौंपी गई जिम्मेदारी
ममता बनर्जी की चिंता केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। पार्टी के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि बगावत की यह लहर संसदीय इकाइयों तक भी पहुंच सकती है। इसी कारण वरिष्ठ सांसदों को सांसदों के बीच संपर्क बनाए रखने और संभावित टूट को रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस बीच बागी गुट का कहना है कि उनका विरोध ममता बनर्जी से नहीं, बल्कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से है। वहीं, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद खुलकर ममता बनर्जी के समर्थन में सामने आए हैं और दावा कर रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस इस संकट से उबर जाएगी।
कालीघाट में होने वाली बैठक को अब ममता बनर्जी की राजनीतिक पकड़ और पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है।



