International News: भारत-यूके संबंधों का नया अध्याय! व्यापार, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में हुए बड़े समझौते

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर के भारत दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी है। व्यापार, रक्षा, तकनीक, शिक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों और पहलों पर सहमति बनी है।

International News: भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर अपने दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। विदेश मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा था।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-यूके विजन 2035 के तहत चल रहे सहयोग की समीक्षा करना और व्यापार, रक्षा, तकनीक तथा वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी को और मजबूत बनाना था।

प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात

नई दिल्ली में यवेट कूपर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते सहयोग और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हाल के वर्षों में भारत-यूके साझेदारी लगातार मजबूत हुई है, जिससे दोनों देशों के लिए विकास और निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि “भारत-यूके विजन 2035” आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देता रहेगा और वैश्विक स्तर पर साझा प्रयासों को मजबूती प्रदान करेगा।

जयशंकर और कूपर के बीच हुई व्यापक वार्ता

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और यवेट कूपर के बीच पहली वार्षिक द्विपक्षीय बैठक भी आयोजित हुई। दोनों नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में व्यापार, तकनीक, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

डॉ. जयशंकर ने भारत-यूके संबंधों को “साझा आर्थिक आकांक्षाओं और उच्च तकनीक आधारित भविष्य का हाईवे” बताया।

उन्होंने कहा कि दोनों देश क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बनी सहमति

दौरे के दौरान दोनों देशों ने भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने का स्वागत किया और इसके जल्द क्रियान्वयन पर सहमति जताई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में बड़ी बढ़ोतरी होगी और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

अनुमान है कि इस समझौते से भारत और ब्रिटेन के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये तक की वृद्धि हो सकती है।

क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन पर विशेष फोकस

ब्रिटेन की विदेश मंत्री ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ मिलकर यूके-भारत क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (GSCO) सेंटर का उद्घाटन किया।

यह पहल दोनों देशों को बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण और हाई-टेक उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

समुद्री सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत और ब्रिटेन ने ‘रीजनल मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

यह केंद्र समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, समुद्री डकैती और अन्य गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

शिक्षा क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग

भारत और ब्रिटेन के बीच शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा सहयोग देखने को मिला है। साउथेम्प्टन और क्वींस यूनिवर्सिटी के बाद अब ब्रिटेन के सात और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को भारत में अपने अंतरराष्ट्रीय ब्रांच कैंपस खोलने की मंजूरी दी गई है।

इन विश्वविद्यालयों में यॉर्क, ब्रिस्टल, लिवरपूल और लैंकेस्टर जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। नए कैंपस 2026-27 शैक्षणिक सत्र से भारत में शुरू हो सकते हैं।

इससे भारतीय छात्रों को विदेश गए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा

बैठक के दौरान दोनों देशों ने यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

दोनों पक्षों ने नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।

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भारत-यूके रिश्तों का नया दौर

यवेट कूपर की यह यात्रा भारत और ब्रिटेन के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। व्यापार, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और रणनीतिक संसाधनों के क्षेत्र में हुए समझौते दोनों देशों के दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और ब्रिटेन की साझेदारी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Written By: Ekta Verma

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