
National News: कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP को लेकर चल रही बहस के बीच लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अगर 5 जून तक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वे 6 जून को दिल्ली में होने वाले CJP के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होंगे।
सोनम वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा, “अगर हम नहीं, तो कौन? अगर अभी नहीं, तो कब?” उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर अब गंभीर चर्चा की जरूरत है।
वांगचुक ने बताया कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके से बातचीत की है। शुरुआत में उन्हें इस आंदोलन को लेकर कई शंकाएं थीं, लेकिन बातचीत और उपलब्ध आंकड़ों को देखने के बाद उन्हें लगा कि यह युवाओं की आवाज़ उठाने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को विदेशी साजिश बताने के बजाय उसके मुद्दों को समझना ज्यादा जरूरी है।
आखिर क्या है कॉकरोच जनता पार्टी?
कॉकरोच जनता पार्टी या CJP कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं है। यह एक व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन है, जिसकी शुरुआत मई 2026 में हुई थी। बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और युवाओं की अनदेखी जैसे मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर यह अभियान तेजी से लोकप्रिय हुआ।
इस आंदोलन की शुरुआत राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने की थी। देखते ही देखते सोशल मीडिया पर लाखों युवा इससे जुड़ गए। कई लोगों ने इसे भारत के Gen-Z वर्ग की नाराजगी और डिजिटल विरोध का नया रूप बताया। आंदोलन के समर्थकों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक विचारधारा से ज्यादा युवाओं की आवाज़ को मंच देने की कोशिश है।
सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो में कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग एक राजनीतिक मुद्दा हो सकता है, लेकिन उनके लिए असली चिंता देश की शिक्षा व्यवस्था है। उन्होंने याद दिलाया कि वे पिछले चार दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उन्होंने हमेशा बेहतर शिक्षा व्यवस्था की वकालत की है।
उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति में कई सकारात्मक पहलें हैं, लेकिन किसी भी नीति की सफलता उसके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उनका मानना है कि शिक्षा से जुड़े सवालों पर सरकार, छात्रों और समाज के बीच खुली बातचीत होनी चाहिए।
अब सभी की नजरें 6 जून पर टिकी हैं। यदि सोनम वांगचुक इस प्रदर्शन में शामिल होते हैं, तो यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर चल रही बहस को भी नई दिशा मिल सकती है।
Written By: Ekta Verma



