संगम की पावन धरती पर स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) वर्षों से कला, संस्कृति और कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए जाना जाता है। हर वर्ष आयोजित होने वाली इसकी ग्रीष्मकालीन कार्यशाला बच्चों और युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उन्हें कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगारपरक अवसरों की दिशा में भी प्रेरित करती है। इस वर्ष भी केंद्र में ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन इसकी विशेषता इसे पिछले वर्षों की कार्यशालाओं से अलग बनाती है।
चित्रकारी पर मुख्य फोकस
केंद्र के उपनिदेशक के अनुसार इस बार कार्यशाला का मुख्य फोकस चित्रकला पर रखा गया है। खास बात यह है कि प्रतिभागियों को केवल चित्र बनाना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि चित्रकला में उपयोग होने वाले रंगों के चयन और उनके महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इस बार बच्चों और युवाओं को प्राकृतिक रंगों का प्रयोग कर चित्रकला करने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे जहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलेगा, वहीं प्रतिभागियों को पारंपरिक और प्राकृतिक कला विधाओं की समझ भी विकसित होगी। कार्यशाला में शामिल प्रशिक्षकों द्वारा प्राकृतिक रंगों के निर्माण और उनके उपयोग की बारीकियों को भी सिखाया जा रहा है। इससे प्रतिभागी न केवल अपनी कलात्मक क्षमता को बढ़ा सकेंगे, बल्कि भविष्य में हस्तशिल्प, चित्रकला और कला आधारित उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार की संभावनाओं को भी तलाश सकेंगे।

बहु प्रशिक्षण उन्मुख है कार्यशाला
हालांकि कार्यशाला केवल चित्रकला तक सीमित नहीं है। केंद्र ने इस बार विभिन्न कला विधाओं को भी शामिल किया है ताकि प्रतिभागियों को बहुआयामी प्रशिक्षण मिल सके। कार्यशाला के दौरान रंगमंच, लोकगायन, भरतनाट्यम और कथक जैसी विधाओं का भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। अनुभवी प्रशिक्षक प्रतिभागियों को इन कलाओं की तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी प्रदान करेंगे। रंगमंच के माध्यम से बच्चों और युवाओं में आत्मविश्वास, संवाद कौशल और मंच संचालन की क्षमता विकसित होगी, जबकि लोकगायन उन्हें भारतीय लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करेगा। वहीं भरतनाट्यम और कथक जैसे शास्त्रीय नृत्य प्रशिक्षण प्रतिभागियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहराई से परिचित कराएंगे।
अलग अलग श्रेणियां की गई निर्धारित
कार्यशाला में भाग लेने के लिए आयु वर्ग के अनुसार अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। केंद्र प्रशासन ने सभी वर्गों के लिए निर्धारित शुल्क और आयु सीमा तय की है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें। 8 वर्ष से 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं 16 वर्ष से 40 वर्ष तक के युवा और युवतियां 750 रुपये शुल्क देकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा 40 वर्ष आयु वर्ग में केवल महिलाओं को भाग लेने की अनुमति दी गई है, जिससे वे भी अपनी रुचि और प्रतिभा को नई पहचान दे सकें। केंद्र के अधिकारियों का मानना है कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आज के समय में रोजगार और आत्मनिर्भरता का भी सशक्त साधन बन चुकी है। यही कारण है कि कार्यशाला को इस तरह डिजाइन किया गया है कि प्रतिभागियों को कला के व्यावहारिक और व्यावसायिक दोनों पहलुओं की जानकारी मिल सके।
निखर रही प्रतिभाएं
ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के माध्यम से उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र एक बार फिर बच्चों, युवाओं और महिलाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्रदान कर रहा है। प्राकृतिक रंगों की अवधारणा, विविध कलाओं का प्रशिक्षण और रोजगारपरक दृष्टिकोण इस वर्ष की कार्यशाला को विशेष और उपयोगी बना रहे हैं। कला और संस्कृति के प्रति रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह कार्यशाला सीखने, समझने और अपनी पहचान बनाने का एक सुनहरा अवसर साबित हो सकती है।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों युवाओं और महिलाओं को अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका देना है, जिससे उनकी प्रतिभा को एक मंच मिल सके। इसी के साथ साथ उनके हुनर को निखार एक मंच प्रदान करना है। इसके लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र जाना जाता है और आगे भी इसी तरह कार्यशालाओं का आयोजन होता रहेगा।
डॉ.मुकेश उपाध्याय
उपनिदेशक उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र
रिपोर्ट : आकाश त्रिपाठी


