
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) Rajeev Krishna ने अपने कार्यकाल के एक वर्ष पूरे होने पर सोमवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर यूपी पुलिस की उपलब्धियों, चुनौतियों और आगामी प्राथमिकताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बीते एक वर्ष के दौरान पुलिस विभाग ने नागरिक केंद्रित कार्यप्रणाली और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम किया है।
डीजीपी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में पुलिस ने 10 प्रमुख प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्य किया। अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, पुलिस कल्याण और तकनीकी सुधारों पर विशेष फोकस रखा गया।
मिशन शक्ति से महिला अपराधों में कमी
डीजीपी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान के तहत व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए और पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने बताया कि दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ पीड़िताओं से लगातार फॉलोअप संपर्क भी किया जा रहा है। मिशन शक्ति के तहत कई श्रेणियों के अपराधों में 9.5 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेष रणनीति
डीजीपी ने कहा कि कोविड काल के बाद साइबर अपराधों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसे देखते हुए यूपी पुलिस ने व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। अब तक 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध से निपटने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में लगभग 450 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज की गई है, जो देश में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। पुलिस मुख्यालय स्तर पर साइबर सुरक्षा और इंटरनेट आधारित हमलों की निगरानी भी की जा रही है।
AI तकनीक से पकड़े जा रहे अपराधी
राजीव कृष्ण ने बताया कि यूपी पुलिस द्वारा AI आधारित तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। ‘यक्ष’ जैसे AI प्रोग्राम के माध्यम से टेक्स्ट, वॉयस और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अपराधियों की निगरानी की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि फेस जेनरेशन और आधुनिक तकनीकों की मदद से कई फरार अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस कर्मियों को लगातार नई तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
पुलिस कल्याण पर विशेष ध्यान
डीजीपी ने बताया कि पुलिस परिवारों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के सहयोग से दुर्घटना में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों को 137 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है।
इसके अलावा पुलिसकर्मियों के लिए बीमा कवर, 200 क्षमता वाले छात्रावास और 51 हजार से अधिक कर्मियों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई है।
सड़क हादसों में कमी लाने पर फोकस
डीजीपी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों की पहचान कर वहां सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। जिलों में डीएम की अध्यक्षता में गठित समितियां लगातार समीक्षा कर रही हैं।
BNS के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पुलिस का प्रयास है कि 60 से 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाए और डिजिटल साक्ष्यों का बेहतर उपयोग हो।
ई-समन व्यवस्था को भी तेजी से लागू किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत मामलों में ई-समन की सुविधा शुरू की जा चुकी है।
संगठित अपराध और आतंकवाद पर सख्त कार्रवाई
DGP ने कहा कि संगठित अपराधियों और उनसे जुड़े व्हाइट कॉलर अपराधियों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा माफिया नेटवर्क की आर्थिक और आपराधिक कमर तोड़ने की है।
आतंकवाद के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सीमा पार बैठे तत्व सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में एटीएस और एसटीएफ ने हाल के दिनों में 12 से 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी मामले में पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी।



