डॉक्टरों पर गिर सकती है जाँच समिति की गाज, रिपोर्ट में खुल सकते है कई अहम राज

The investigation committee may take action against the doctors; the report may reveal many important secrets

20 मई को महिला अधिवक्ताओं से मारपीट के मामले में बीस रेजिडेंट डॉक्टरों का निलंबन तो कुछ पर एफआईआर की कार्यवाही हुई थी। यह वहीं डॉक्टर है जिन्हें धरती पर भगवान का दर्जा दिया जाता है। महिला अधिवक्ताओं से मारपीट के मामले ने डॉक्टरों की भगवान वाली छवि को पूर्णत: धूमिल किया है। मरीज और हर वो शख्स डॉक्टरों के इस रवैये को देख कर दंग रह गया कि जिन्हें हम भगवान का दर्जा देते है वो महिलाओं के साथ इस तरह से दुर्व्यवहार कर रहे है और अपनी बातों को मनवाने के लिए हर हद पार करने को तैयार दिखे। मारपीट के बाद डॉक्टरों ने कई दिनों तक धरना प्रदर्शन भी किया था। धरना प्रदर्शन के दौरान एसआरएन अस्पताल में सारी सेवाएं बाधित रही और मरीजों को खासा समस्या का सामना करना पड़ा। मारपीट में शामिल बीस रेजीडेंट डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के साथ साथ उन पर कार्यवाही करने के लिए जाँच समिति का गठन किया गया है।
मरीजों की समस्या देख नहीं पसीजा दिल
डॉक्टरों के तीन दिनों के धरना प्रदर्शन के चलते सारी सेवाएं बाधित थी। मरीजों को मायूस हो कर घर वापस जाना पड़ा था। मरीजों को तड़पते और दर्द से बिलखते देख कर भी इन डॉक्टरों का मन नहीं पसीजा और वो अपनी मांग पर ही अड़े रहे। जिस वजह से मरीजों और उनके तीमारदारों को बिना इलाज के ही मायूस हो घर वापस जाना पड़ा। एसआरएन अस्पताल जिले का एकलौता सरकारी अस्पताल है, जहां पर सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि इसके निकट कई जिलों से लोग इलाज कराने आते है। अब, अगर रोजाना मरीजों की संख्या की बात करें, तो एसआरएन अस्पताल में रोजाना साढ़े तीन हजार से चार मरीज इलाज कराने आते है। इस घटना ने धरती के भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टरों की छवि को खासा धूमिल किया। इसके साथ ही साथ मरीजों और उनके तीमारदारों के मन में भय का बीज बो दिया।
तीन सदस्सीय समिति का गठन
सूत्रों की माने, तो एसआरएन अस्पताल के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. वी.के. पांडे को भी इस मामले के चलते पद विमुक्त किया गया था। स्वरूपरानी अस्पताल के वर्तमान प्राचार्य डॉ. अजय कुमार वर्मा ने बताया कि बीस को हुई घटना में शामिल डॉक्टरों और कर्मचारियों की संलिप्तता की निष्पक्ष जाँच करने के लिए जाँच कमेटी का गठन किया गया है। इस जाँच समिति में तीन लोगों को शामिल किया गया है। इसी के साथ प्राचार्य ने बताया कि यह जाँच समिति जो भी निर्णय लेगी वही निर्णय मान्य होगा। इस जाँच में दोषी पाये जाने वाले ्ररेजीडेंट डॉक्टरों और घटना के दौरान मौजूद कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.दिलीप चौरसिया ने बताया कि निलंबित डॉक्टरों और घटना के वक्त ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को रोजाना ऑफिस में बुलाकर हस्ताक्षर करवाया जा रहा है। इस रिपोर्ट में कई अहम राज खुलने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट : आकाश त्रिपाठी

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