
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में CJP द्वारा आयोजित प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर झड़पें शुरू हो गईं। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। वहीं प्रदर्शनकारियों की ओर से कथित तौर पर पथराव किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिनमें आईपीएस अधिकारी और दिल्ली व अंडमान-निकोबार पुलिस सेवा के अधिकारी भी बताए जा रहे हैं। सभी घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है, हालांकि उनकी आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। पुलिस का दावा है कि जब प्रदर्शन हिंसक हो गया और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव शुरू हुआ, तब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
इस घटना पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना देश के हर नागरिक का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी या सरकारी कर्मचारी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसका दायित्व संविधान के प्रति है, न कि किसी सरकार या व्यक्ति के प्रति।
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि सत्ता हमेशा स्थायी नहीं रहती और हर निर्णय की जवाबदेही तय होती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से संविधान के मूल्यों का पालन करने और निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई से बचने की अपील की।
दूसरी ओर प्रदर्शन कर रहे CJP के प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई और उन पर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाने की मांग की है। तीसरी मांग के तहत प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर नीट पेपर लीक मामले से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान CJP के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से भी मुलाकात की। बैठक में नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से मार्च और भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की ताकि सामान्य स्थिति बहाल हो सके। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बताया गया है कि प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित एक लिखित ज्ञापन भी सरकार को सौंपा है।
फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। वहीं पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस कार्रवाई की सीमा और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।


