
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। केंद्र सरकार लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर अपनी आपत्तियां तेज कर दी हैं और कई नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
रिजिजू बोले—दक्षिणी राज्यों को गुमराह किया जा रहा
केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि कुछ लोग परिसीमन से जुड़े गलत आंकड़े पेश कर दक्षिण भारतीय राज्यों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को आरक्षण देने के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी दलों को नारी सशक्तिकरण के लिए एकजुट होना चाहिए।
रिजिजू ने यह भी कहा कि प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा की सीटें बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती हैं, जिससे सभी राज्यों को आनुपातिक रूप से फायदा मिलेगा और किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा।
विपक्ष और दक्षिणी राज्यों ने जताई चिंता
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने परिसीमन को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा दक्षिणी राज्यों के लिए गंभीर है और यदि केंद्र ने उनकी बात नहीं सुनी तो राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
वहीं राज्यसभा सांसद Kapil Sibal ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो मौजूदा सीटों में ही महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें तय की जाएं।
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विशेष सत्र में अहम फैसलों की उम्मीद
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
Written By: Kalpana Pandey



