
Entertainment News: भारतीय टेलीविजन के स्वर्णिम दौर की बात करें तो रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिकों का नाम सबसे पहले लिया जाता है। इन सीरियलों ने न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि एक सांस्कृतिक छाप भी छोड़ी जो आज तक कायम है। ‘महाभारत’ में धृतराष्ट्र का किरदार निभाने वाले गिरिजा शंकर ने अपने अभिनय से इस भूमिका को इतना जीवंत बना दिया कि यह किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।
हालांकि, जिस कलाकार ने इतनी लोकप्रियता हासिल की, वही कुछ समय बाद अचानक इंडस्ट्री से दूर हो गया और विदेश में जाकर बस गया। आज, 38 साल बाद, गिरिजा शंकर की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है और वह एक अलग ही दुनिया में अपनी पहचान बना चुके हैं।
एयरफोर्स का सपना, लेकिन किस्मत ने मोड़ दिया रास्ता
गिरिजा शंकर का बचपन पंजाब के पटियाला में बीता। वह कभी अभिनेता नहीं बनना चाहते थे, बल्कि उनका सपना भारतीय वायुसेना में अफसर बनने का था। उन्होंने इसके लिए परीक्षा भी दी, लेकिन असफल रहे। यही वह मोड़ था जहां से उनकी जिंदगी ने नया रास्ता पकड़ा।
इसके बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और पृथ्वी थिएटर से जुड़कर थिएटर करना शुरू किया। यहीं पर उनकी प्रतिभा निखरी और एक दिन उनकी परफॉर्मेंस ने मशहूर फिल्म निर्माता बी.आर. चोपड़ा का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यही वह पल था जिसने उनकी किस्मत बदल दी।
धृतराष्ट्र का रोल—हिचकिचाहट से लेकर ऐतिहासिक पहचान तक
थिएटर में शानदार अभिनय के बाद बी.आर. चोपड़ा ने उन्हें पहले फिल्म ‘आज की आवाज’ में मौका दिया। इसके बाद उन्हें महाभारत में धृतराष्ट्र का किरदार ऑफर किया गया। उस समय गिरिजा शंकर की उम्र सिर्फ 28 साल थी और उन्हें एक बुजुर्ग, नेत्रहीन राजा की भूमिका निभानी थी।
शुरुआत में वह इस रोल को लेकर असमंजस में थे, क्योंकि उन्हें लगा कि यह किरदार उनके करियर को सीमित कर सकता है। लेकिन जब उन्होंने महाभारत की कहानी और धृतराष्ट्र के चरित्र की गहराई को समझा, तो उन्हें एहसास हुआ कि यह कहानी का एक केंद्रीय और बेहद महत्वपूर्ण किरदार है। इसके बाद उन्होंने पूरे समर्पण के साथ इस भूमिका को निभाने का फैसला किया।
किरदार में ढलने के लिए झेला शारीरिक और मानसिक दबाव
धृतराष्ट्र का किरदार निभाना आसान नहीं था। गिरिजा शंकर को करीब दो साल तक एक ही लुक और एक ही बॉडी लैंग्वेज बनाए रखनी पड़ी। उन्हें हर समय एक ही मुद्रा में बैठना होता था, जिससे उनके शरीर पर काफी दबाव पड़ता था।
सबसे बड़ी चुनौती थी—नेत्रहीनता को वास्तविक दिखाना। इसके लिए उन्हें अपनी आंखों को इस तरह ट्रेन करना पड़ता था कि वे बिना फोकस के सीधी रहें। कई बार इस वजह से उन्हें थकान महसूस होती थी और शूटिंग के बीच ब्रेक लेना पड़ता था।
उन्होंने इस भूमिका की तैयारी के लिए नेत्रहीन बच्चों के स्कूलों में जाकर उनके व्यवहार, चलने-फिरने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को करीब से समझा। यही कारण था कि उनका अभिनय इतना वास्तविक और प्रभावशाली बन पाया।
लोकप्रियता मिली, लेकिन करियर में ठहराव भी आया
महाभारत की सफलता ने गिरिजा शंकर को घर-घर में पहचान दिलाई। लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और ‘धृतराष्ट्र’ के नाम से ज्यादा जानने लगे।
हालांकि, यही पहचान उनके लिए चुनौती भी बन गई। बाद में उन्होंने ‘बुनियाद’, ‘उतरन’ और अलिफ लैला जैसे धारावाहिकों में काम किया और कई फिल्मों में भी नजर आए, लेकिन उन्हें वैसी लोकप्रियता दोबारा नहीं मिल पाई। उनका करियर एक तरह से उसी किरदार तक सीमित होकर रह गया।
भारत छोड़कर लॉस एंजेलिस में बसने का फैसला
कुछ सालों बाद गिरिजा शंकर ने एक बड़ा फैसला लिया—उन्होंने भारत और फिल्म-टीवी इंडस्ट्री को छोड़कर अमेरिका के लॉस एंजेलिस में बसने का निर्णय लिया।
वहां जाकर उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया और अंग्रेजी व पंजाबी फिल्मों का निर्माण करने लगे। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी एक नई पहचान बनाई और पूरी तरह से वहां के फिल्मी माहौल में खुद को स्थापित कर लिया। उनका परिवार भी अब वहीं बस चुका है।
क्यों छोड़ा देश और इंडस्ट्री? खुद बताई वजह
एक इंटरव्यू में गिरिजा शंकर ने बताया कि वह जिस तरह का काम करना चाहते थे, उसके लिए उन्हें विदेश में ज्यादा आजादी और बेहतर अवसर मिले। उनके अनुसार, भारत में कंटेंट को लेकर कई तरह की सीमाएं और विवाद सामने आते हैं, जबकि लॉस एंजेलिस में रचनात्मक स्वतंत्रता ज्यादा है।
उन्होंने यह भी कहा कि वहां वह बिना किसी दबाव के अपनी सोच के अनुसार काम कर सकते हैं, जो उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण था। यही कारण था कि उन्होंने विदेश में बसने का फैसला किया और अपने करियर को एक नई दिशा दी।
गिरिजा शंकर भले ही आज भारत से दूर हों, लेकिन ‘महाभारत’ में निभाया गया उनका धृतराष्ट्र का किरदार हमेशा याद किया जाएगा। यह सिर्फ एक अभिनय नहीं था, बल्कि एक ऐसी छाप थी जिसने उन्हें भारतीय टेलीविजन इतिहास में अमर कर दिया।
Written By: Anushri Yadav



