
UP News:उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की संभावित योजना को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक योगी आदित्यनाथ सरकार महिलाओं को सालाना 50 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद देने की योजना पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित योजना के तहत पात्र महिलाओं को पूरी रकम एक साथ देने के बजाय अलग-अलग किस्तों में आर्थिक सहायता दी जा सकती है। चर्चा है कि चुनाव से पहले 20 हजार रुपये की पहली किस्त और बाकी राशि बाद की किस्तों में देने का प्रस्ताव हो सकता है। हालांकि लाभार्थियों की संख्या, आय सीमा, उम्र और पात्रता जैसे नियम अभी अंतिम रूप से तय नहीं बताए जा रहे हैं।
कमजोर वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, योजना में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। अनुसूचित जाति-जनजाति और गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की महिलाओं को संभावित लाभार्थियों में शामिल किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा कुछ अन्य आय वर्ग की महिलाओं को भी योजना में शामिल किया जा सकता है। हालांकि इन मानकों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर बोला हमला
प्रस्तावित योजना को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के समय महिलाओं को आर्थिक मदद देने की बात कर रही है। अखिलेश ने सवाल उठाया कि यदि सरकार महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती थी तो पिछले वर्षों में ऐसी सहायता क्यों नहीं दी गई।
अखिलेश यादव ने प्रस्तावित 50 हजार रुपये की राशि को लेकर भी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने अपने बयान में पिछले 10 वर्षों के हिसाब से राशि का गणित पेश करते हुए कहा कि महिलाओं को इससे कहीं अधिक रकम मिलनी चाहिए थी। उन्होंने प्रस्तावित योजना को लेकर सरकार की नीयत और चुनावी समय पर घोषणा की संभावित वजह पर सवाल उठाए।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल महिलाओं को 50 हजार रुपये सालाना देने की योजना को लेकर सरकार की ओर से अंतिम घोषणा का इंतजार है। योजना कब लागू होगी, किन महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा और राशि किस तरह दी जाएगी, इसकी तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी। चुनाव से पहले सामने आई इस संभावित योजना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा जरूर तेज कर दी है।



