
Uttarakhand News: उत्तराखंड के चमोली जिला प्रशासन ने बद्रीनाथ धाम समेत जिले के अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के आसपास तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। किसी भी आयोजन के लिए अब प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम समेत अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की धार्मिक गरिमा और शांति बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से नए निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने का फैसला किया है, जिनमें हाई-फ्रीक्वेंसी या तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है और जिससे धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित होती है।
धार्मिक स्थलों के पास आयोजन के लिए लेनी होगी अनुमति
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने निर्देश दिया है कि जिले के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के आसपास किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले स्थानीय प्रशासन की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसमें श्री बद्रीनाथ धाम भी शामिल है।
प्रस्तावित कार्यक्रम की जांच संबंधित क्षेत्र के उप जिलाधिकारी (SDM)करेंगे और अनुमति भी वही जारी करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के आयोजनों की अनुमति देने का अधिकार किसी अन्य विभाग या अधिकारी के पास नहीं होगा।
नियम तोड़ने पर होगी कानूनी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों और समितियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बद्रीनाथ में सांस्कृतिक महोत्सव के बाद उठे सवाल
प्रशासन का यह फैसला बद्रीनाथ धाम के पास 19 और 20 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026’ के बाद सामने आया है। यह कार्यक्रम बद्रीनाथ के नवनिर्मित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम को लेकर कुछ स्थानीय नागरिकों, धार्मिक नेताओं और श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि बद्रीनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल के आसपास होने वाले कार्यक्रमों को क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।
आयोजन को लेकर प्रशासन और आयोजकों ने क्या कहा?
बद्रीनाथ नगर पंचायत के कार्यकारी अधिकारी सुनील पुरोहित के मुताबिक, यह कार्यक्रम व्यावसायिक मनोरंजन कार्यक्रम नहीं था। उनके अनुसार, इसका आयोजन चमोली जिला प्रशासन और सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत संयुक्त रूप से किया था।
कार्यक्रम की थीम ‘Our Heritage, Our Future’ थी। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में तैनात सैन्यकर्मियों और दूरदराज के हिमालयी सीमावर्ती गांवों के लोगों के बीच संपर्क और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करना था।
धार्मिक परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम कराने की मांग
तीर्थ श्री बद्री धाम धार्मिक पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने कहा कि बद्रीनाथ दुनिया भर के हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र है। उन्होंने भविष्य में यहां होने वाले कार्यक्रमों में भजन संध्या और पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों जैसे आयोजनों को प्राथमिकता देने की बात कही।
वहीं, बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने भी कहा कि भविष्य के कार्यक्रम बद्रीनाथ की विरासत और धार्मिक स्वरूप के अनुरूप आयोजित किए जाने चाहिए और धार्मिक स्थल की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रशासन के नए आदेश के बाद अब बद्रीनाथ धाम और चमोली के अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों के आसपास होने वाले कार्यक्रमों के लिए पूर्व अनुमति और प्रशासनिक जांच की व्यवस्था लागू होगी।



