India-Nepal : पहले मुलाकात से किया था परहेज, अब विक्रम मिसरी से मिले बालेन शाह; क्या भारत के प्रति बदला नेपाल का रुख?

India-Nepal : नेपाल के PM बालेन शाह ने भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मुलाकात की। 2 अरब डॉलर के सहायता पैकेज, सीमा विवाद, ऊर्जा और गोरखा भर्ती पर चर्चा हुई।

India-Nepal : भारत और नेपाल के रिश्तों में जमी तल्खी के बीच कूटनीतिक संपर्कों में तेजी आती दिखाई दे रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने शुक्रवार को काठमांडू में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मुलाकात की। यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले शाह ने भारतीय विदेश सचिव के साथ प्रस्तावित मुलाकात टाल दी थी। अब दोनों नेताओं की बातचीत को भारत-नेपाल संबंधों में संभावित बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

संयुक्त बयान के मुताबिक, बैठक में जल संसाधन, ऊर्जा और व्यापार समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा नेपाल की ओर से भारत से 2 अरब डॉलर से अधिक के आर्थिक सहायता पैकेज की मांग, कालापानी-लिपुलेख सीमा विवाद और भारतीय सेना में गोरखा भर्ती का मुद्दा भी बातचीत के प्रमुख विषय रहे।

पहले टाली थी मुलाकात, अब बदला कूटनीतिक रुख

बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ उनके कूटनीतिक व्यवहार पर लगातार नजर रही है। मई में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी का प्रस्तावित नेपाल दौरा रद्द हो गया था। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, शाह की ओर से विदेश मंत्री के पद से नीचे के विदेशी अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठक नहीं करने की नीति को इसके पीछे की वजह बताया गया था।

इससे पहले शाह ने अमेरिकी अधिकारियों पॉल कपूर और सर्जियो गोर से भी मुलाकात करने से परहेज किया था। हालांकि, भारत के साथ संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ। जून में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की अध्यक्ष रबी लामिछाने ने नई दिल्ली का दौरा किया। इसके बाद जुलाई में बालेन शाह ने भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की।

अब विक्रम मिसरी के साथ उनकी बैठक को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद आगे बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बाढ़ राहत में भारत ने भेजी 140 टन से अधिक सामग्री

भारत और नेपाल के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में मानवीय सहायता की भी अहम भूमिका रही है। अगस्त में नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्यों में सहयोग दिया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 26 अगस्त से 19 सितंबर के बीच नेपाल को 140 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी गई। इसमें बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था को बहाल करने के उपकरण, बचाव दल और सुरंग निर्माण के विशेषज्ञ शामिल थे।

सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान बालेन शाह ने भारत की सहायता की सराहना भी की थी। उन्होंने नेपाल, भारत और चीन को शामिल करते हुए हिमालयी जलवायु लचीलापन तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा था।

नेपाल ने मांगा 2 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक पैकेज

विक्रम मिसरी और बालेन शाह की मुलाकात में आर्थिक सहायता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल ने भारत से अनुदान और ऋण सुविधा (लाइन ऑफ क्रेडिट) के माध्यम से 2 अरब डॉलर से अधिक यानी करीब 18,786 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की मांग की है।

नेपाल बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे, बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता चाहता है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। नेपाल के वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने सुझाव दिया है कि बालेन शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान इस संबंध में घोषणा हो सकती है।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से फिलहाल इस कथित सहायता पैकेज को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

कालापानी-लिपुलेख विवाद और गोरखा भर्ती पर भी चर्चा

भारत और नेपाल के बीच कुछ मुद्दे लंबे समय से विवाद का कारण बने हुए हैं। इनमें कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र से जुड़ा सीमा विवाद प्रमुख है। दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों को लेकर अलग-अलग दावे रहे हैं।

इसके अलावा भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 2022 में अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाल ने भारतीय सेना में गोरखा भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। नेपाल का तर्क है कि नई भर्ती व्यवस्था भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच 1947 में हुए त्रिपक्षीय समझौते की भावना के अनुरूप नहीं है।

बालेन शाह की संभावित भारत यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ सकती है।

क्या भारत-नेपाल संबंधों में आएगी नई गर्मजोशी?

विक्रम मिसरी के साथ बालेन शाह की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। नेपाल के लिए भारत आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा और संपर्क व्यवस्था का महत्वपूर्ण साझेदार है। वहीं भारत के लिए नेपाल के साथ स्थिर और मजबूत संबंध सामरिक तथा क्षेत्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, एक मुलाकात से दोनों देशों के बीच सभी मतभेद खत्म होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन आर्थिक सहायता, बाढ़ राहत और द्विपक्षीय सहयोग पर हुई बातचीत से संकेत मिलता है कि दोनों देश संवाद के जरिए रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

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