प्रागैतिहासिक तकनीकों से रूबरू हुए छात्र

Students introduced to prehistoric technologies

प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की एक्सपेरिमेंटल आरक्यूलॉजिकल लैबोरेटरी में 4 मई से 8 मई 2026क प्रिहिस्ट्री एंड एक्सपेरिमेंटल आरक्यूलॉजी विषय पर आधारित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शनिवार को हुआ।  तकार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान के अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. गौतमी भट्टाचार्य, सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. आशीष रंजन साहू एवं सहायक पुरातत्वविद् संताश्रय के साथ पीजी डिप्लोमा के 15 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के प्रथम दिवस विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकांत ने अतिथियों एवं छात्रों का स्वागत किया।

इसके बाद प्रो. प्रकाश सिन्हा ने विद्यार्थियों को टूल टोपोलॉजी, टेक्रोलॉजी उपकरण निर्माण प्रक्रिया तथा होमिनिड्स के जीवन परिवेश और सांस्कृतिक सामग्री के बारे में जानकारी दी। दूसरे सत्र में प्रशिक्षण प्रयोगात्मक पुरातत्व प्रयोगशाला में आयोजित हुआ, जहां डॉ. शैलेश कुमार यादव एवं डॉ.अमित सिंह ने फ्लिंट-लैपिंग तकनीक का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों को रॉ मेटिरियल और हैमर स्टोंस के चयन के साथ फ्लैक्स और ब्लेड निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। द्वितीय दिवस पर प्रो. सिन्हा ने ब्लेड टाइप्स और उनकी तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद विद्यार्थियों को स्वयं निर्मित पुरावशेषों के डॉक्यूमेंटेश और रिकॉर्डिंग का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें टूल्स एनालिसिस तथा फोटोग्राफी शामिल रही। तृतीय दिवस पर डॉ. अमित सिंह ने माइक्रो वियर स्टडीज के माध्यम से पुरावशेषों के सूक्ष्म अध्ययन की विधियां समझाईं।

वहीं पुरा-वनस्पतिशास्त्री डॉ. तुलिका ने फिटोलिथ एक्ट्रैक्शन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। छात्रों को यह बताया गया कि उत्खनन से प्राप्त मिट्टी एवं वनस्पतियों से फिटोलिथ कैसे निकाले जाते हैं। विद्यार्थियों ने अपने द्वारा निर्मित उपकरणों का उपयोग बांस, घास और शेल पर कटिंग, विटिंग तथा बोरिंग के लिए किया, जिससे माइक्रोस्कोप के माध्यम से स्कार पैर्टन, स्ट्रीएशन और पॉलिश का विश्लेषण किया जा सके। चतुर्थ दिवस पर डॉ. तुलिका ने फिटोलिस के प्रकार एवं उनके पुरातात्विक अनुप्रयोगों की जानकारी दी। इसके साथ ही डॉ. शैलेश कुमार यादव ने जीआईएस सॉफ्टवेयर की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। अंतिम दिवस पर प्रो. प्रकाश सिन्हा ने एसपीएसएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पुरातात्विक आंकड़ों के विश्लेषण का प्रशिक्षण दिया।

समापन सत्र में विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकांत ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. अतुल नारायण सिंह ने शैक्षणिक अंत:क्रियाओं के महत्व पर बल दिया। इस अवसर पर डॉ. जे.एस. नौलखा, डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. राघवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. गर्गी चटर्जी, डॉ. मोहाना आर. तथा डॉ. अजय कुमार सहित विभाग के अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे। शोधार्थी गौरव गुप्ता, वरुण शुक्ला, मेघा कुमारी, मैरी टोमी मोलसोम एवं सत्यम यादव ने कार्यक्रम के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।

रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी

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