
huge crisis-
बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। कमर्शियल और छोटे पैट्रोपैक्स गैस सिलेंडरों की कीमतों में अचानक हुई भारी वृद्धि ने घरों का बजट बिगाड़ दिया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की बात करें तो इसका दाम 2254 से बढ़कर के 3254 रूपए पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर 5 किलोग्राम वाले पैट्रोपैक्स सिलेंड की बाते करें तो इसका दाम 589 से बढ़कर के 850 कर दिया गया है, जबकि घरों में इस्तेमाल होने वाले 14 केजी वाले सिलेंडर का दाम 966 रूपए है ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि जब 116 रूपए अतिरिक्त देकर के 14 किलों ग्राम वाला गैस सिलेंडर मिल रहा है तो भला लोग छोट सिलेडर क्यों खरिदेंगे।
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दारागंज कच्ची सड़क के रहने वाले श्रीधर ने निषाद का कहना है कि गैस सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ गैस सिलेंडरों की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ स्थानों पर 14 किलो के घरेलू सिलेंडर 1,500 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं। इससे आम लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ रही हैं। एजेंसी मालिकों का मानना है कि यह संकट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ है। वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में आई बाधाओं का सीधा असर भारत के ईंधन बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में अनिश्चितता के चलते कीमतों में यह तेज उछाल देखने को मिला है। कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे बाजार पर भी पड़ने लगा है। होटल, ढाबा और छोटे फूड बिजनेस संचालकों का कहना है कि उनकी लागत अचानक बढ़ गई है, जिससे उन्हें खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और महंगाई की मार और तेज हो सकती है।
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दूसरी ओर, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोग पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर की हो रही कालाबाजारी उनके लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो रही है। कई परिवार अब गैस के सीमित उपयोग या वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख करने पर मजबूर हो रहे हैं। सरकार की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई ठोस राहत की घोषणा नहीं की गई है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार को इस संकट को गंभीरता से लेते हुए कीमतों को नियंत्रित करने और आपूर्ति को सुचारु बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे महंगाई की दर पर भी असर पड़ेगा और आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
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कुल मिलाकर, कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में यह अचानक वृद्धि और सप्लाई संकट ने आम आदमी की रसोई से लेकर बाजार तक हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में सरकार और तेल कंपनियों के कदम ही तय करेंगे कि इस संकट से कितनी जल्दी राहत मिल पाएगी।



