
International News: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अपनी दो देशों की आधिकारिक यात्रा के पहले चरण में मंगोलिया पहुंचे, जहां उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की। इस यात्रा को भारत और मंगोलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी, विकास सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उलानबटार पहुंचने पर मंगोलिया के स्टेट सेक्रेटरी मुंकतुशिग इल्खानाजाव ने उनका स्वागत किया। इसके बाद विदेश मंत्री ने अपनी मंगोलियाई समकक्ष बटसेत्सेग बटमुंख के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, शिक्षा, संस्कृति, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की।
बैठक के बाद डॉ. जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने विकास परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मंगोल ऑयल रिफाइनरी परियोजना भारत-मंगोलिया सहयोग की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसके अलावा आईसीटी सेंटर, एक स्कूल और कई क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीक, आर्थिक सहयोग, सप्लाई चेन, शिक्षा, संस्कृति और ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
विदेश मंत्री ने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से भी मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष राष्ट्रपति उखना की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और मंगोलिया के बीच सबसे मजबूत रिश्ता आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का है।

अपने दौरे के दौरान डॉ. जयशंकर ने गंदन मठ के प्रमुख मठाधीश खंबा नोमुन खान गेशे लहारम्पा डी. जावज़ानदोरज तथा मंगोलिया की संसद के स्पीकर सैंडाग ब्यांबात्सोत से भी मुलाकात की। इन बैठकों में सांस्कृतिक, धार्मिक और संसदीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री ने उद्योग एवं खनन मंत्री गोंगोर डामदिनन्याम और विदेश मंत्री बटसेत्सेग बटमुंख के साथ मंगोल ऑयल रिफाइनरी परियोजना के निर्माण स्थल का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना में कार्यरत भारतीय और मंगोलियाई कर्मचारियों से बातचीत कर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उनकी सराहना की।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. एस. जयशंकर की यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और मंगोलिया के साथ बढ़ते रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती देगी। रक्षा, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, शिक्षा, संस्कृति और व्यापार जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के संबंधों को और व्यापक बनाएगा।



