
Gaya to Gyeongju India Korea Friendship: दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित चार दिवसीय ‘बुसान इंटरनेशनल बुद्धिज्म एक्सपो 2026’ में भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत और भारत-कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों की झलक देखने को मिली। बुसान के बेक्सको कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस वैश्विक सांस्कृतिक आयोजन में दक्षिण कोरिया स्थित भारतीय दूतावास ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। एक्सपो की मुख्य थीम ‘शून्यता और आधुनिक जीवन’ के बीच रखी गई थी। इसी के तहत भारतीय पवेलियन में ‘गया से ग्योंगजू: बुद्ध धम्म के जरिए भारत-कोरिया दोस्ती’ विषय पर विशेष प्रदर्शनी लगाई गई, जो आयोजन में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रही।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदर्शनी की तस्वीरें साझा करते हुए भारत और दक्षिण कोरिया के बीच साझा बौद्ध विरासत को रेखांकित किया। दूतावास की ओर से बताया गया कि ‘गया से ग्योंगजू’ प्रदर्शनी के जरिए भारत के पवित्र बौद्ध सर्किट से लेकर दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को सामने रखा गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल भारत की बौद्ध विरासत को प्रदर्शित करना नहीं था, बल्कि कोरियाई दर्शकों को भारत की उन ऐतिहासिक परंपराओं से जोड़ना भी था, जिन्होंने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क को मजबूत किया है।
प्रदर्शनी में भारत के प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों और बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। बोधगया, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, भारत की बौद्ध विरासत के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है। भारतीय पवेलियन में इस विरासत को दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। ग्योंगजू ऐतिहासिक रूप से शिल्ला राजवंश का प्रमुख केंद्र रहा है और आज भी दक्षिण कोरिया की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहरों में गिना जाता है।
‘गया से ग्योंगजू’ नाम अपने आप में भारत और कोरिया के बीच ऐतिहासिक संबंधों की ओर संकेत करता है। प्रदर्शनी में कोरिया के प्राचीन गया साम्राज्य और भारत के अयोध्या के बीच माने जाने वाले ऐतिहासिक संबंधों को भी स्थान दिया गया। कोरियाई इतिहास और परंपराओं में अयोध्या से जुड़ी कथाओं का उल्लेख दोनों देशों के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संपर्क की चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इस प्रदर्शनी के जरिए इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कड़ियों को आधुनिक दर्शकों के सामने एक व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
भारत के लिए बौद्ध धर्म केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि उसकी प्राचीन सभ्यता, दर्शन, कला और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। बुद्ध के जीवन से जुड़े कई प्रमुख स्थल भारत में मौजूद हैं, जिन्हें दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक देखने आते हैं। बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर और राजगीर जैसे स्थान बौद्ध सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रदर्शनी में भारत की इसी विरासत को कोरियाई दर्शकों के सामने रखा गया और उन्हें भारत की आध्यात्मिक यात्रा से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
एक्सपो में बड़ी संख्या में कोरियाई नागरिकों, बौद्ध भिक्षुओं, युवाओं और वैश्विक आगंतुकों ने हिस्सा लिया। भारतीय पवेलियन में मौजूद सामग्री ने लोगों को भारत की प्राचीन ध्यान परंपराओं, बौद्ध दर्शन, कला और ऐतिहासिक संबंधों को समझने का अवसर दिया। विशेष रूप से युवाओं के बीच भारत के बौद्ध तीर्थस्थलों और आध्यात्मिक परंपराओं को लेकर उत्सुकता देखने को मिली। प्रदर्शनी ने भारत को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि बौद्ध दर्शन और आध्यात्मिक परंपराओं की जन्मभूमि के रूप में समझने का अवसर भी दिया।
भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध आज केवल सांस्कृतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, व्यापारिक और रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में साझा बौद्ध विरासत दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क और आपसी समझ को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। बौद्ध धर्म की शिक्षाएं दोनों देशों के बीच एक ऐसे सभ्यतागत पुल का काम करती हैं, जिसकी जड़ें आधुनिक कूटनीतिक संबंधों से कहीं अधिक पुरानी हैं।
भारतीय दूतावास की इस पहल को सांस्कृतिक कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। किसी देश की संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक विरासत को दूसरे देश के लोगों तक पहुंचाने से आपसी संबंधों में केवल सरकारी संवाद ही नहीं, बल्कि जनस्तर पर भी जुड़ाव बढ़ता है। ‘गया से ग्योंगजू’ प्रदर्शनी ने इसी दिशा में भारत की बौद्ध विरासत को दक्षिण कोरियाई समाज के सामने प्रभावी ढंग से रखने का काम किया।
बुसान इंटरनेशनल बुद्धिज्म एक्सपो 2026 में भारत की भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों की नींव केवल आधुनिक आर्थिक और तकनीकी साझेदारी पर आधारित नहीं है। इसके पीछे हजारों वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कड़ियां भी मौजूद हैं। बुद्ध धम्म के जरिए भारत और कोरिया के बीच जुड़ी यह साझा विरासत आज भी दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने की क्षमता रखती है। ‘गया से ग्योंगजू’ इसी ऐतिहासिक दोस्ती और साझा सभ्यतागत विरासत को आधुनिक मंच पर सामने लाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में सामने आई।



