
International News: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां—अमेरिका और रूस। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने कुछ ही घंटों के अंतराल में भारत को लेकर ऐसे बयान दिए हैं, जिन्होंने वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती ताकत को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
एक तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को अपना भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताते हुए उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर तारीफ की। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।
सवाल यह है कि आखिर दोनों महाशक्तियां एक साथ भारत को लेकर इतने सकारात्मक बयान क्यों दे रही हैं? इसके पीछे क्या कूटनीतिक संदेश छिपा है?
भारत-रूस संबंधों पर खुलकर बोले पुतिन
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को रूस का बेहद महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और भविष्य में भी दोनों देशों के संबंध और गहरे होंगे।
पुतिन ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर प्रभावशाली शक्ति बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने में सक्षम है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
ट्रंप ने मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके अच्छे मित्र हैं और दोनों देशों के बीच संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं में जल्द प्रगति हो सकती है। ट्रंप ने भरोसा जताया कि दोनों देश व्यापार समझौते के करीब पहुंच सकते हैं।
हालांकि ट्रंप पहले कई बार भारत की टैरिफ नीतियों की आलोचना कर चुके हैं, लेकिन इस बार उन्होंने दोस्ती और सहयोग पर ज्यादा जोर दिया।
दोनों बयानों के पीछे क्या है असली संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन और ट्रंप के बयानों का सबसे बड़ा संदेश यह है कि आज वैश्विक राजनीति में भारत की अहमियत लगातार बढ़ रही है।
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इसके अलावा 1.4 अरब से अधिक आबादी, विशाल बाजार, मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था और बढ़ती सामरिक ताकत ने भारत को विश्व राजनीति का अहम खिलाड़ी बना दिया है।
रूस चाहता है कि भारत उसके साथ अपनी पारंपरिक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाए, जबकि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत को एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देखता है।
यही वजह है कि दोनों महाशक्तियां भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखना चाहती हैं।
भारत की संतुलित विदेश नीति की जीत
पुतिन और ट्रंप के बयानों से एक और बात स्पष्ट होती है कि भारत की बहुपक्षीय और संतुलित विदेश नीति सफल साबित हो रही है।
भारत एक तरफ रूस के साथ रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को बनाए हुए है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ व्यापार, तकनीक और सुरक्षा साझेदारी को भी लगातार मजबूत कर रहा है।
यही संतुलन आज भारत को वैश्विक कूटनीति में एक ऐसी स्थिति में ले आया है, जहां दुनिया की बड़ी शक्तियां उसके साथ संबंध मजबूत रखने को प्राथमिकता दे रही हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
दोनों नेताओं के बयानों का मूल संदेश यही है कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दुनिया की बड़ी शक्तियां भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखने के लिए उत्सुक हैं।
Written By: Ekta Verma



