
Political News: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव लड़ रहीं कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस और विपक्षी दल इस फैसले को लेकर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर खुलकर निशाना साधा।
प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं के मामलों में चुनाव आयोग अलग रवैया अपनाता है, जबकि विपक्षी नेताओं के मामलों में सख्ती दिखाई जाती है।
उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि उनके चुनावी हलफनामों में शैक्षणिक योग्यता को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आने के बावजूद चुनाव आयोग ने कार्रवाई नहीं की। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन एक विवादित शिकायत के आधार पर खारिज कर दिया गया।
बीजेपी की आपत्ति के बाद बढ़ा विवाद
राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा ने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नहीं दी।
आपत्ति में कहा गया कि एक महिला द्वारा अदालत में दायर याचिका में नटराजन का नाम सामने आया है और इस जानकारी को नामांकन के दौरान सार्वजनिक किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस ने बताया राजनीतिक साजिश
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई औपचारिक आपराधिक मामला चल रहा है।
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार उम्मीदवार को केवल दर्ज मामलों की जानकारी देनी होती है। केवल अदालत से नोटिस मिलने को मामला दर्ज होना नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे विपक्ष को चुनावी मैदान से बाहर करने की राजनीतिक कोशिश बताया।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ तेलंगाना की एक अदालत में दायर याचिका है, जिसमें मीनाक्षी नटराजन पर एक आरोपी व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित व्यक्ति पर छेड़छाड़ और धमकी जैसे आरोप लगाए हैं।
हालांकि, नटराजन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि यह उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है। उन्होंने अदालत में भी इस याचिका का विरोध किया है।
चुनाव आयोग के फैसले पर बढ़ी बहस
नामांकन रद्द होने के बाद विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि उम्मीदवारों को अपने हलफनामों में सभी जरूरी जानकारियां देना अनिवार्य है और नियमों का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और विवाद बढ़ने की संभावना है।



